तमिलनाडु के केंद्रीय विश्वविद्यालय के रसायन विज्ञान विभाग ने एक तेज़, किफायती विधि विकसित की है जो शुद्ध गाय के घी में कई प्रकार की मिलावटों को 1% तक सटीक रूप से पहचानती और मात्रा निर्धारित करती है। यह तकनीक भविष्य में पोर्टेबल डिवाइस में एकीकृत होने की संभावना रखती है, जिससे खाद्य सुरक्षा निगरानी में क्रांति आएगी।

मुख्य बातें

  • नया ASTFS‑MCR‑ALS तरीका घी में 1% तक मिलावट पहचानता है।
  • परीक्षण तेज, गैर‑विनाशकारी और प्रति नमूना लगभग ₹50 खर्चीला है।
  • वैज्ञानिक इसे पोर्टेबल हैंडहेल्ड डिवाइस में एकीकृत करने की योजना बना रहे हैं।

तमिलनाडु केंद्रीय विश्वविद्यालय (CUTN) के रसायन विज्ञान विभाग के शोधकर्ताओं ने एक अभिनव विश्लेषणात्मक विधि विकसित की है, जो गाय के दूध से बनी शुद्ध घी में कई प्रकार की मिलावटों को एक ही समय में पहचान और मात्रा निर्धारित कर सकती है।

यह तकनीक Angular Sweep Total Fluorescence Spectroscopy (ASTFS) को Multivariate Curve Resolution‑Alternating Least Squares (MCR‑ALS) के साथ जोड़ती है। शुद्ध घी की फ्लोरेसेंस फिंगरप्रिंट को रिकॉर्ड करके, और उसमें हाइड्रोजनीकृत वनस्पति तेल, बीफ़ टैलो या पोर्क लार्ड जैसी मिलावटें मिलाकर, प्रणाली जटिल स्पेक्ट्रल परिवर्तन को अलग करके प्रत्येक घटक की सटीक मात्रा निकालती है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

घी में मिलावट का मुद्दा दशकों से भारतीय बाजारों में बना हुआ है, जहाँ वानस्पति और अन्य सस्ते वसा को लाभ बढ़ाने के लिए अक्सर घी में मिलाया जाता है। पारंपरिक तरीकों में क्रोमैटोग्राफी या ग्रैविमेट्रिक विश्लेषण शामिल हैं, जो समय‑साध्य, महँगे और आमतौर पर केवल एक ही मिलावट को पहचानते हैं।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

BozokMedia विश्लेषण दिखाता है कि तेज, किफायती और बहु‑मिलावट परीक्षण नियामक प्रवर्तन को सुदृढ़ कर सकता है और उपभोक्ता विश्वास को पुनः स्थापित कर सकता है, विशेष रूप से जब डैरी सेक्टर बढ़ती माँग को पूरा करने के लिए विस्तार कर रहा है।

“एक ही सस्ती माप से घी में कई विदेशी वसाओं की मात्रा निर्धारित करना खाद्य सुरक्षा में क्रांतिकारी बदलाव है,” भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के खाद्य‑प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ डॉ. मीरा सिंह ने कहा।
क्या आप जानते हैं?: भारत सरकार की खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने घी में अधिकतम 2% गैर‑दूध वसा की सीमा तय की है, लेकिन सीमित परीक्षण क्षमता के कारण प्रवर्तन कठिन रहा है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: एक परीक्षण में कितना समय लगता है?

उत्तर: फ्लोरेसेंस माप पाँच मिनट से कम में पूरा हो जाता है, जबकि डेटा प्रोसेसिंग एक मिनट अतिरिक्त लेती है।

प्रश्न 2: क्या यह विधि अन्य डेयरी उत्पादों पर लागू हो सकती है?

उत्तर: सिद्धांत को अनुकूलित किया जा रहा है और वर्तमान में बटर, पनीर और दूध पाउडर पर परीक्षण चल रहे हैं।