नई दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय राजधानी के लोधी‑युग की कब्रों की बुरी हालत को लेकर दिल्ली म्यूनिसिपल कॉरपोरेशन (एमसीडी) और पुरातत्व सर्वेक्षण भारत (एएसआई) को "सम्पूर्ण लापरवाही" का आरोप लगाया। कोर्ट ने दोनों संगठनों के शीर्ष अधिकारियों को व्यक्तिगत उपस्थिति के लिए बुलाया और 7 अक्टूबर को आगे की सुनवाई निर्धारित की।
- सुप्रीम कोर्ट ने एमसीडी और एएसआई को दिल्ली के ज़मरुदपुर कब्रों की उपेक्षा पर कठोर चेतावनी दी।
- कोर्ट ने अतिरिक्त आयुक्त और एएसआई के निदेशक को व्यक्तिगत रूप से हाज़िर होने का आदेश दिया।
- मामले की अगली सुनवाई 7 अक्टूबर को तय की गई।
नई दिल्ली – 25 अगस्त, 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के ज़मरुदपुर क्षेत्र में स्थित लोधी‑युग की पाँच ग्रेड‑I कब्रों की खराब स्थिति और अतिक्रमण के बारे में मीडिया रिपोर्टों को सुनते हुए, नगर निगम दिल्ली (एमसीडी) और पुरातत्व सर्वेक्षण भारत (एएसआई) पर "सम्पूर्ण लापरवाही" और तथ्य छुपाने का आरोप लगाया।
जज अहसनुद्दीन अमनुल्ला और जे. कोटिस्वर सिंह की बेंच ने अतिरिक्त आयुक्त, एमसीडी और एएसआई के निदेशक जनरल को अदालत में पेश होने का निर्देश दिया और 7 अक्टूबर को आगे की सुनवाई के लिए मामला सूचीबद्ध किया। यह कार्रवाई दिल्ली के धरोहर संरचनाओं के संरक्षण के लिये दाखिल की गई एक याचिका के जवाब में की गई, जिसमें स्थानीय निवासी राजीव सुरी ने इन समस्याओं को उजागर किया था।
एमसीडी के एक अप्रैल 10 के रिपोर्ट में कहा गया था कि ज़मरुदपुर में पाँच कब्रों में से केवल एक को संतोषजनक स्थिति में बताया गया, जबकि शेष तीन में अतिक्रमण और कचरा फैलाव की शिकायतें दर्ज थीं। कोर्ट‑नियुक्त कमिशनरों ने बताया कि पाँच ग्रेड‑I धरोहर इमारतें हैं, पर उनमें से एक को ही ट्रेस नहीं किया जा सका।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that neglect of heritage sites not only erodes cultural identity but also hampers tourism revenue, which contributes significantly to Delhi’s economy. The court’s intervention signals a possible shift toward stricter enforcement of heritage protection laws across India.
"Heritage preservation is a collective responsibility; governmental apathy endangers centuries‑old monuments," said Dr. Meera Kapoor, senior historian at the Indian Council of Historical Research.
कोर्ट ने कहा, "हमारे पास कोई विकल्प नहीं बचा कि एमसीडी के अतिरिक्त आयुक्त और एएसआई के निदेशक जनरल को शपथपत्र के माध्यम से कारण बताने को कहा जाए कि इस अदालत को इस प्रकार के लापरवाहीपूर्ण व्यवहार पर गंभीर नोट क्यों नहीं लेना चाहिए।" यह बयान प्रशासनिक अज्ञानता को रोकने के लिये एक कड़ी चेतावनी के रूप में देखा गया।
ऐसे मामलों में अक्सर स्थानीय प्रशासन की अकार्यक्षमता और बजट की कमी को प्रमुख कारण माना जाता है, पर रिपोर्टों ने यह भी संकेत दिया कि कुछ मामलों में तथ्य छुपाने की कोशिश भी की गई। यह मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर धरोहर संरक्षण के लिये नीति‑निर्माताओं को सतर्क कर सकता है।
Frequently Asked Questions
Q1: सुप्रीम कोर्ट ने अगले सुनवाई की तिथि कब तय की?
A: अगली सुनवाई 7 अक्टूबर, 2026 को निर्धारित की गई है।
Q2: क्या एएसआई ने इस मामले में कोई सुधारात्मक कदम उठाए हैं?
A: अभी तक कोई औपचारिक उत्तर नहीं मिला है; अदालत ने अधिकारियों को लिखित जवाब देने का आदेश दिया है।