एरोड के हथकरघा बुनकरों ने राज्य सरकार से वेतन, भत्ता और पेंशन में तत्काल सुधार की माँग की है। उन्होंने 30 जुलाई को भवानी, शिवागिरी और चेनिमलाई में एक साथ प्रदर्शन करने का फैसला किया।

Key Takeaways

  • हाथकरघा बुनकरों ने वेतन और भत्ते में वृद्धि की माँग की।
  • 60 वर्ष से अधिक उम्र के बुनकरों की पेंशन ₹1,200 से बढ़ाकर ₹6,000 करने की मांग।
  • सरकार को हाथकरघा सहायता, सब्सिडी और कच्चे माल की कीमत घटाने के उपाय अपनाने का आग्रह।

एरोड जिले की ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (AITUC) से संबद्ध हथकरघा बुनकर यूनियन ने 25 जुलाई को शिवागिरी में आयोजित जिला सम्मेलन में तीन स्थानों – भवानी, शिवागिरी और चेनिमलाई – में 30 जुलाई को प्रदर्शन करने का निर्णय लिया। इस कदम का उद्देश्य हथकरघा क्षेत्र को सुरक्षित करने और बुनकरों के कल्याण को बढ़ाने के लिए आवश्यक उपायों को सरकार के सामने रखना है।

Historical Background

हथकरघा उद्योग भारत की सांस्कृतिक विरासत का अहम हिस्सा रहा है, परन्तु पिछले दो दशकों में मशीनरी‑आधारित पावरलूम ने इस पारम्परिक व्यवसाय को गंभीर खतरा दिया है। तमिलनाडु में कई बुनकरों ने आय में गिरावट, वृद्धावस्था पेंशन में कमी और कच्चे माल की बढ़ती कीमतों के कारण आर्थिक संकट झेला है।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that यदि हथकरघा बुनकरों के लिए उचित वेतन और सब्सिडी नहीं दी गई तो न केवल उनके जीवन स्तर में गिरावट आएगी, बल्कि भारत की निर्यात‑उन्मुख वस्त्र उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मकता भी प्रभावित होगी।

"हथकरघा बुनकरों को उचित आर्थिक सुरक्षा न मिलने पर इस पारम्परिक कला का अंत हो सकता है," कहते हैं वस्त्र नीति विशेषज्ञ डॉ. रवींद्र सिंह।

सम्मेलन में बुनकरों ने राज्य सरकार से मूल वेतन और महंगाई भत्ते (Dearness Allowance) को पुनः निर्धारित करने, तथा 60 वर्ष से अधिक उम्र के बुनकरों की पेंशन को ₹1,200 से बढ़ाकर ₹6,000 करने का आग्रह किया। इसके अलावा, उन्होंने तमिलनाडु हथकरघा कार्यकर्ता कल्याण बोर्ड के तहत कल्याण सहायता को बढ़ाने, हथकरघा आरक्षण अधिनियम के कड़ाई से पालन और पावरलूम द्वारा निर्मित वस्त्रों को हथकरघा उत्पाद बताने से रोकने की मांग की।

अन्य प्रमुख प्रस्तावों में कच्चे माल की कीमत घटाना, हथकरघा वस्त्रों पर रिबेट बढ़ाना, सरकारी खरीद में हथकरघा सहकारी समितियों के उत्पादों को प्राथमिकता देना, रिबेट सब्सिडी के शीघ्र भुगतान, सहकारी समितियों में लोकतांत्रिक चुनाव कराना और ठेकेदार‑कर्मचारियों को नियमित बनाना शामिल है।

Did You Know?: भारत में केवल 2% हथकरघा उत्पाद ही औद्योगिक रूप से बड़े पैमाने पर निर्यात होते हैं, जबकि बाकी 98% स्थानीय बाजार में ही बिकते हैं।

Frequently Asked Questions

Q1: हथकरघा बुनकरों की पेंशन वृद्धि की मांग क्यों महत्वपूर्ण है?
A1: वृद्ध बुनकरों के पास सीमित आय स्रोत होते हैं, इसलिए पेंशन में वृद्धि उनके बुनियादी जीवनयापन को सुरक्षित करती है।

Q2: सरकार किन उपायों से हथकरघा उद्योग को पुनर्जीवित कर सकती है?
A2: वेतन सुधार, कच्चे माल की कीमत घटाना, रिबेट बढ़ाना और सरकारी खरीद में सहकारी उत्पादों को प्राथमिकता देना प्रभावी कदम हैं।