एक यूट्यूब वीडियो में केरल के आरएसएस विचारधारा के प्रवक्ता टीजी मोहनदास ने दिल्ली के जंतर मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन को दमन करने के लिए गोली चलाने की बात कही, जिससे सोशल मीडिया में तीखा विरोध हुआ। इस बयान पर एआईएसएफ ने पुलिस में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई।
मुख्य बिंदु
- मोहनदास ने जंतर मंतर के आसपास कर्फ्यू और गोलीबारी की धमकी दी।
- उनके बयान में महिलाओं के प्रति आपत्तिजनक टिप्पणी शामिल थी।
- एआईएसएफ ने इस बयान को हिंसा को भड़काने के रूप में दर्ज किया और पुलिस से कार्रवाई की मांग की।
विवाद का विस्तार
यूट्यूब चैनल ‘पथरिका’ पर अपलोड किए गए वीडियो में, तिरुवनंतपुरम के आरएसएस विचारधारा के प्रवक्ता टीजी मोहनदास ने कहा कि यदि वह जंतर मंतर के प्रदर्शन को संभाल रहा होता तो पहले 4 किमी के दायरे में कर्फ्यू लागू करता और तीन बार हटने का आदेश देता। इन आदेशों के बाद भी यदि प्रदर्शनकारियों ने नहीं माना तो उन्हें गोली मारने का आदेश देता।
उन्होंने महिलाओं के बारे में “बलात्कार-प्रेमी” जैसी आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग किया, जिससे महिला अधिकार संगठनों में गुस्सा बढ़ गया। उनके बयान को कई सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने हिंसा को प्रोत्साहित करने के रूप में ले कर निंदा की।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
टीजी मोहनदास एक प्रशिक्षित इंजीनियर और वकील हैं, जिन्होंने कई वर्षों तक पत्रकारिता, टेलीविज़न प्रस्तुति और सामाजिक टिप्पणी में काम किया। वे आरएसएस और भाजपा के निकट जुड़े हुए हैं, और पूर्व में भाजपा के इंटेलेक्चुअल सेल के राज्य संयोजक एवं भारतीय विचार केंद्र में नेतृत्व पद पर रहे हैं। 2012 में उन्होंने ‘केसरी’ में लेख लिखकर बीजेपी‑सीपीआई(एम) सहयोग की संभावना पर चर्चा को उजागर किया, जिससे दोनों धड़ों में बहस छिड़ गई।
क्यों मायने रखता है
BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि ऐसे बयान न केवल लोकतांत्रिक अधिकारों को क्षति पहुंचाते हैं, बल्कि सामाजिक तनाव को बढ़ाते हैं और कानून व्यवस्था के प्रति सार्वजनिक विश्वास को कमजोर करते हैं। जब सार्वजनिक व्यक्तित्व हिंसा की ओर इशारा करते हैं, तो यह कई समूहों को असहज कर सकता है और संभावित दंगे का कारण बन सकता है।
ऐसे बयान लोकतंत्र की नींव को कमजोर करते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: क्या मोहनदास के बयान पर कोई कानूनी कार्रवाई हुई है?
उत्तर: एआईएसएफ ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है और जांच के तहत मोहनदास के खिलाफ अपराधीकरण की संभावना है।
प्रश्न 2: इस विवाद का केरल राजनीति पर क्या असर पड़ेगा?
उत्तर: यह विवाद भाजपा और आरएसएस की छवि को नुकसान पहुंचा सकता है, जबकि विपक्षी दल इसको अपने समर्थन को मजबूत करने का अवसर देख सकते हैं।