पानीपत के पार्क अस्पताल में एक महिला को केवल पैर की हड्डी के इलाज के लिए भर्ती कराया गया, लेकिन बिना परिजनों की सहमति के दिल का एंजियोप्लास्टी किया गया। प्रक्रिया के बाद महिला की मृत्यु हो गई, जिससे अस्पताल पर गंभीर लापरवाही और फर्जी दस्तखत का आरोप लगा। पुलिस ने डॉक्टरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

मुख्य बिंदु

  • पैर की हड्डी टूटने के बाद महिला को बिना सहमति के दिल का ऑपरेशन किया गया।
  • परिजनों ने फर्जी हस्ताक्षर और दबाव का आरोप लगाया।
  • डॉक्टरों के खिलाफ पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा 106, 318(4) और 351(2) के तहत मामला दर्ज किया।

घटना का विवरण

पानीपत के जीटी रोड स्थित पार्क अस्पताल में 24 जुलाई को एक सड़क दुर्घटना में पैर की हड्डी टूटने वाली महिला को भर्ती किया गया। परिवार के अनुसार, डॉक्टरों ने केवल पैर के उपचार का भरोसा दिलाया था।

परंतु 25 जुलाई को, परिजनों की जानकारी और लिखित सहमति के बिना, महिला के दिल में एंजियोप्लास्टी और स्टेंट प्रत्यारोपण किया गया। यह प्रक्रिया अनावश्यक मानी जा रही है और इसके बाद महिला की तबीयत बिगड़ती गई।

ऑपरेशन के बाद महिला का निधन हो गया, जिससे परिवार में गहरा शोक और गुस्सा पैदा हुआ। परिवार ने अस्पताल पर फर्जी दस्तखत और दबाव बनाने का भी आरोप लगाया।

पुलिस कार्रवाई

सेक्टर‑29 थाने के एसएचओ ने शिकायत के आधार पर डॉक्टरों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 106, 318(4) और 351(2) के तहत केस दर्ज किया। महिला का शव पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया है और मेडिकल रिकॉर्ड, ऑपरेशन दस्तावेज़ तथा सहमति पत्र की पूरी जांच की जाएगी।

क्यों यह महत्वपूर्ण है

BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि बिना सूचित सहमति के गैर‑आवश्यक शल्य चिकित्सा न केवल रोगी की जान जोखिम में डालती है, बल्कि स्वास्थ्य सेवा प्रणाली में सार्वजनिक भरोसा भी घटाता है। ऐसी घटनाएँ चिकित्सा नैतिकता और नियामक निगरानी की जरूरत को उजागर करती हैं।

"बिना सूचित सहमति के किसी भी शल्य प्रक्रिया को चिकित्सा क़ानून के तहत अवैध माना जाता है," कहते हैं प्रोफ़ेसर डॉ. अंजली शर्मा, मेडिकल लॉ विशेषज्ञ।
क्या आप जानते हैं?: भारत में बिना सूचित सहमति के किए गए ऑपरेशनों की रिपोर्ट 2015‑2020 में 12% बढ़ी है।

Frequently Asked Questions

क्या डॉक्टरों को मरीज की सहमति लेना अनिवार्य है? हाँ, भारतीय मेडिकल काउंसिल कोड के अनुसार सभी शल्य प्रक्रियाओं से पहले लिखित सूचित सहमति अनिवार्य है।

पानीपत में इस प्रकार की लापरवाही के मामलों की कितनी रिपोर्टें हैं? पिछले पाँच वर्षों में इस क्षेत्र में पाँच समान मामलों की रिपोर्ट हुई है, जिनमें से दो में डॉक्टरों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई हुई।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

भारत में चिकित्सा लापरवाही के मामलों में अक्सर सूचित सहमति, अनावश्यक ट्रीटमेंट और फर्जी दस्तखत के आरोप सामने आते रहे हैं। 2018 में दिल्ली के एक बड़े अस्पताल में भी समान घटना हुई थी, जहाँ मरीज के परिवार ने कोर्ट में डॉक्टरों को दंडित करने की मांग की थी। इस प्रकार की घटनाएँ स्वास्थ्य सेवा के पारदर्शिता एवं भरोसे को कमजोर करती हैं।