पेरुंदुरै के पास पेतहम्पालयम गांव के किसानों ने जल, कृषि और पर्यावरण पर संभावित असर को लेकर प्रस्तावित पत्थर खनन एवं क्रशिंग यूनिट को रोकने की मांग की। उन्होंने 100 से अधिक हस्ताक्षर के साथ जिला प्रशासन को याचिका दी।

मुख्य बिंदु

  • स्थानीय ग्रामीणों ने खनन परियोजना को रोकने के लिए याचिका दायर की।
  • 20 से अधिक बोरवेल जल स्रोतों पर संभावित असर की चिंता।
  • कृषि‑आधारित आजीविका की रक्षा हेतु अनुमति को अस्वीकार करने की मांग।

ग्रामीणों की याचिका

एरोज़ जिले के पेरुंदुरै के पास स्थित पेतहम्पालयम में रहने वाले 50 से अधिक परिवारों के 100 से अधिक सदस्य ने शनिवार को जिला प्रशासन को एक विस्तृत याचिका प्रस्तुत की। इस याचिका में उन्होंने प्रस्तावित पत्थर खनन और क्रशिंग यूनिट को न मंजूरी देने की माँग की है, क्योंकि इससे जल‑भूगर्भीय स्तर, कृषि उत्पादन और स्थानीय पर्यावरण पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा।

पिछला विरोध और पुनरुज्जीवन

ग्रामीणों ने पहले 26 मई 2025 को भी इस परियोजना के खिलाफ प्रतिनिधित्व किया था, जिससे खनन कार्य कुछ समय के लिए रोका गया था। हालाँकि, अब उन्हें जानकारी मिली है कि अधिकारियों द्वारा परियोजना को फिर से सक्रिय करने के प्रयास चल रहे हैं, जिससे उन्होंने पुनः कार्रवाई का मार्ग चुना।

पर्यावरणीय और कृषि प्रभाव

याचिका के अनुसार, प्रस्तावित स्थल के आसपास 20 से अधिक बोरवेल हैं, जो कृषि भूमि को जल प्रदान करते हैं। खनन और पत्थर पीसने की प्रक्रिया से जलस्तर घट सकता है, धूल व शोर से फसलें क्षति हो सकती हैं और स्थानीय जैव विविधता में बाधा उत्पन्न हो सकती है। पाँच पड़ोसी गाँव भी इस परियोजना के दायरे में हैं।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that unchecked quarry expansion in Tamil Nadu has historically led to groundwater depletion and displacement of farming communities. Protecting the agrarian base here could set a precedent for other vulnerable districts.

"सतत कृषि के लिए जल संसाधनों की रक्षा प्राथमिकता होनी चाहिए, न कि अल्पकालिक आर्थिक लाभ," जलवायु विशेषज्ञ डॉ. अंशु कुमारी ने कहा।

Historical Background

तमिलनाडु में पिछले दो दशकों में कई बार खनन परियोजनाओं को लेकर किसानों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं के बीच टकराव हुआ है। 2012 में कोयम्बटूर के पास एक समान परियोजना को स्थानीय विरोध के कारण रद्द किया गया था, जिससे जल संरक्षण नीतियों पर पुनर्विचार हुआ।

क्या आप जानते हैं?: भारत में हर साल 1.2 मिलियन हेक्टेयर कृषि भूमि खनन के कारण अनुपयोगी हो जाती है।

Frequently Asked Questions

Q1: क्या खनन परियोजना को फिर से शुरू किया जा सकता है?
A1: यदि जिला प्रशासन अनुमति देता है और पर्यावरणीय मंजूरी मिलती है, तो संभव है, लेकिन वर्तमान में स्थानीय विरोध तेज़ है।

Q2: इस विवाद का राज्य सरकार पर क्या असर पड़ेगा?
A2: राज्य को सतत विकास और जल सुरक्षा को संतुलित करने वाली नीतियों को फिर से परिभाषित करना होगा, जिससे भविष्य में समान मामलों में स्पष्ट दिशा‑निर्देश बनेंगे।