हाथकरघा दिवस के अवसर पर 7‑8 अगस्त को चेन्नई में आयोजित इस प्रदर्शनी में बांग्लादेश के कंथा से राजस्थान के बंधनी तक, 39 स्टॉल्स में विविध भारतीय वस्त्र कला को प्रदर्शित किया जाएगा।
मुख्य बिंदु
- हाथकरघा दिवस पर 39 स्टॉल्स के साथ राष्ट्रीय वस्त्र प्रदर्शन
- बंगाल, राजस्थान, बेंगलुरु सहित विभिन्न क्षेत्रों की पारम्परिक कढ़ाई और बंधनी
- स्थायी फैशन और शून्य‑वेस्टेज पहलों की झलक
चेनाई में राष्ट्रीय वस्त्र धरोहर का मेले
भारत के क्राफ्ट्स काउंसिल (CCI) ने 7‑8 अगस्त को चेन्नई के MRC सेंटर में एक दो‑दिवसीय प्रदर्शनी का आयोजन किया है, जिसमें देश भर के शिल्पकार, डिज़ाइनर और परम्परागत तकनीकें एक साथ आएँगी। यह कार्यक्रम हाथकरघा दिवस के सम्मान में आयोजित किया गया है।
विविधता का जश्न
प्रदर्शनी में 39 स्टॉल्स पर विभिन्न प्रकार के साड़ी, कपड़े, और हस्तनिर्मित वस्त्र प्रदर्शित किए जाएंगे। बंधनी, लेहरिया, कंथा, इकट आदि के रंग‑रोगन तकनीकों को विशेष रूप से उजागर किया जाएगा।
बंगाल की Weavers Studio की प्रस्तुति
पश्चिम बंगाल की Weavers Studio की संस्थापिका दर्शन मेकानी शाह ने बंगाल की समृद्ध वस्त्र शब्दावली को आधुनिक रूप में पेश किया है। उनके संग्रह में खादी, कपास, लिनन और एरी सिल्क के साथ-साथ गमचा, जामदानी और टांगाइल जैसे विंटेज मोटिफ़ शामिल हैं।
स्थायी फैशन के नवाचार
शांतिनिकेतन स्थित बीज एंड कंपनी ने फूल‑पत्ते से इको‑प्रिंटिंग की तकनीक से तैयार किए गए अनोखे साड़ी और स्टोल्स प्रदर्शित किए हैं। संस्थापक प्रोफ़ेसर विशाल बी.भण्ड और बीजॉय हल्दर ने कहा, "प्राकृतिक रंगों से प्रिंटिंग करने से हर पीस अद्वितीय बनता है और पर्यावरणीय प्रभाव घटता है।"
"वस्त्र परम्पराओं को जीवित रखने के लिए स्थानीय कारीगरों को आर्थिक समर्थन देना अनिवार्य है," विशेषज्ञ रवींद्र जैन ने टिप्पणी की।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that such nationwide showcases boost regional economies and reinforce cultural identity, while also promoting sustainable production practices across the textile sector.
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: इस प्रदर्शनी में प्रवेश शुल्क है क्या?
उत्तर: नहीं, सभी दर्शकों के लिए प्रवेश मुफ्त है।
प्रश्न 2: क्या यहाँ पर खरीदारी की सुविधा भी होगी?
उत्तर: हाँ, कई स्टॉल्स पर सीधे कलाकारों से वस्त्र खरीदने का विकल्प उपलब्ध होगा।