दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा साक्षी ने बताया कि मेटा ने भारत में उनके चार इंस्टाग्राम वीडियो को कम्युनिटी गाइडलाइन के तहत प्रतिबंधित कर दिया। उन्होंने कहा कि पोस्ट हटाए जाने के कारण भी स्पष्ट नहीं है।
मुख्य बिंदु
- मेटा ने 4 CJP विरोध वीडियो को प्रतिबंधित किया
- वीडियो में पुलिस घोषणा, ट्रक, और SFI गीत शामिल थे
- छात्रा ने गाइडलाइन उल्लंघन का कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया
दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) की छात्रा साक्षी ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म मेटा पर चार अपने इंस्टाग्राम वीडियो को भारत में अनुपलब्ध बताया। ये वीडियो ‘वस्तेगनहुईयन’ आंदोलन के दौरान वायरल हुए थे।
साक्षी के अनुसार, तीन वीडियो को "कम्युनिटी गाइडलाइन" के तहत प्रतिबंधित किया गया, जबकि एक पोस्ट को "वयस्क यौन शोषण और नग्नता" के कारण हटाया गया। प्रतिबंधित वीडियो में पुलिस घोषणा की नकल, लाठी चार्ज के बाद पुलिस को भोजन ले जा रहे ट्रक, और छात्रों के संघ (SFI) द्वारा युवा बेरोज़गारी पर गीत शामिल थे।
एक और वीडियो, जिसमें जैनिद (जंतर मंजार पर भोजन वितरित करने वाले) और उनके परिवार के साथ पुलिस के व्यवहार को दर्शाया गया, भी प्रभावित हुआ। साक्षी ने कहा कि वह नहीं जानती कि कौन से गाइडलाइन का उल्लंघन हुआ, जबकि वही प्लेटफ़ॉर्म जब उन्होंने हेट रील्स की रिपोर्ट की तो कोई कार्रवाई नहीं हुई।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows कि सोशल मीडिया पर अभिव्यक्ति की सीमाएं और प्लेटफ़ॉर्म की मॉडरेशन नीतियां लोकतांत्रिक आंदोलन की आवाज़ को सीमित कर सकती हैं, जिससे नागरिक अधिकारों पर असर पड़ता है।
"डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर कंटेंट मॉडरेशन को पारदर्शी और सुसंगत होना चाहिए, खासकर जब वह राजनीतिक अभिव्यक्ति से जुड़ा हो," एक मीडिया कानून विशेषज्ञ ने कहा।
Historical Background
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने जुलाई 2026 में दिल्ली के विभिन्न स्थानों पर विरोध प्रदर्शन किए, जिसमें पुलिस द्वारा लाठी चार्ज और कई गिरफ़्तारी हुई। इस दौरान कई नागरिकों ने सोशल मीडिया पर लाइव अपडेट्स साझा किए, जिससे राष्ट्रीय स्तर पर आंदोलन की कवरेज बढ़ी।
Frequently Asked Questions
- क्या साक्षी के वीडियो को हटाने का कोई वैध कानूनी आधार है? मेटा ने अपने कम्युनिटी गाइडलाइन के आधार पर कार्रवाई की, परंतु विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया।
- क्या इस मामले में कोई कानूनी चुनौती संभव है? हाँ, उपयोगकर्ता अपने अधिकारों की रक्षा के लिए भारतीय न्यायालय में याचिका दायर कर सकते हैं।