कर्नाटक सरकार ने शहर में कार्यरत डिप्टी सुपरिंटेंडेंट (DSP) और इंस्पेक्टर को पाँच साल की कूलिंग अवधि अनिवार्य की। यह कदम शहर के प्रमुख कार्यकालों पर अधिकारियों के कब्जे को रोकने के लिए उठाया गया है।
मुख्य बिंदु
- डिप्टी सुपरिंटेंडेंट (DSP) और इंस्पेक्टर को शहर में अधिकतम पाँच साल तक ही कार्यकाल मिलता है।
- पाँच साल बाद उन्हें गैर‑शहरी इकाइयों में कम से कम पाँच साल भेजा जाएगा।
- भ्रष्टाचार या अनुशासनात्मक कार्यवाही वाले अधिकारियों को उच्च पदों से अयोग्य घोषित किया गया।
कर्नाटक सरकार ने शहर के प्रमुख कार्यकारी पदों में पुलिस अधिकारियों के लंबे समय तक बने रहने को रोकने के लिए एक नया नियम जारी किया है। गृह विभाग के आदेश के अनुसार, डिप्टी सुपरिंटेंडेंट (सिविल) और इंस्पेक्टर (सिविल) केवल पाँच वर्षों तक ही बेंगलुरु, मंगलुरु, मैसूर, हबली‑धारवाड़, बेलगावी और कैलाबुरगी कमिश्नरेट में कार्य कर सकते हैं।
इन पाँच वर्षों के बाद अधिकारी को गैर‑शहरी इकाई में कम से कम पाँच साल तक स्थानांतरित किया जाएगा, जिससे वे फिर से शहर में कार्य नहीं कर पाएंगे जब तक कि वह अवधि पूरी नहीं हो जाती। इसके अतिरिक्त, DSP को दो साल के गैर‑कार्यकारी पद पर तथा इंस्पेक्टर को एक साल के गैर‑कार्यकारी पद पर रहना अनिवार्य किया गया है, उसके बाद ही वे दो साल के कार्यकारी पदों के लिए पात्र होंगे।
Historical Background
2024 में कांग्रेस सरकार ने पुलिस के लिये न्यूनतम दो साल का कार्यकाल लागू करने वाला बिल पारित किया था, जिससे एक साल के कार्यकाल की बाधा को दूर किया गया। 2026 के पुलिस (संशोधन) बिल ने पुलिस एस्टैब्लिशमेंट बोर्ड को अनुशासनहीन या कर्तव्यनिष्ठा में कमी वाले अधिकारियों को तुरंत स्थानांतरित करने का अधिकार दिया, जिससे राजनीतिक हस्तक्षेप को कम करने का लक्ष्य था।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that this cooling period aims to curb the politicisation of police postings and ensure a more merit‑based rotation, thereby strengthening law‑and‑order management in Karnataka’s major urban centres.
“कुलिंग पीरियड से अधिकारियों के बीच सत्ता का एकत्रीकरण रोका जा सकेगा और शहर की पुलिस व्यवस्था अधिक पारदर्शी बनेगी।” – वरिष्ठ पुलिस विशेषज्ञ, डॉ. आर. के. शर्मा
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: क्या इस नियम के तहत सभी शहरों के सभी पद शामिल हैं?
उत्तर: हाँ, बेंगलुरु, मंगलुरु, मैसूर, हबली‑धारवाड़, बेलगावी और कैलाबुरगी के सभी प्रमुख कार्यकारी पद इस नियम के दायरे में आते हैं।
प्रश्न 2: क्या भ्रष्टाचार या अनुशासनात्मक मामलों में फंसे अधिकारी फिर भी शहर में वापसी कर सकते हैं?
उत्तर: नहीं, ऐसे अधिकारियों को उच्च पदों से अयोग्य घोषित किया गया है और उन्हें गैर‑शहरी इकाइयों में ही रखा जाएगा।