कोटा के गाँव गोदल्याहेड़ी में रहने वाले सागर रेगार ने कठिन आर्थिक परिस्थितियों के बीच 98.6296 पर्सेंटाइल के साथ NEET‑UG में सफलता पाई। अपनी बड़ी बहन के कैंसर संघर्ष और पारिवारिक नशे की समस्या ने उसे डॉक्टर बनने की दृढ़ संकल्पित किया।

मुख्य बिंदु

  • सागर ने 98.6296 पर्सेंटाइल के साथ NEET‑UG में 27,157वीं राष्ट्रीय रैंक हासिल की
  • शिक्षा समर्थन योजना के तहत मुफ्त कोचिंग, आवास और भोजन प्राप्त किया
  • भविष्य में डॉक्टर बनकर नशा‑मुक्त और शिक्षा‑प्रेरित समाज की कामना

परिवारिक पृष्ठभूमि

सागर रेगार का जन्म कोटा के पास गोदल्याहेड़ी गाँव में एक दो कमरे वाले घर में हुआ। उसके पिता मुरली रेगार कचरे का संग्रह करके पूरे परिवार की आजीविका चलाते हैं, जबकि माँ गृहिणी हैं। आर्थिक तंगी के कारण सागर को मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी के लिए कोई संसाधन नहीं मिल रहा था।

शिक्षा समर्थन योजना की भूमिका

सरकारी स्कूल के प्रिंसिपल ने सागर को शिक्षा समर्थन योजना के बारे में बताया। इस योजना के तहत उसे एक वर्ष के लिए मुफ्त NEET कोचिंग, आवास और भोजन मिला, जिससे वह पूरी तरह से पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित कर सका।

निजी प्रेरणा

सागर की बड़ी बहन, जो गुटखा की लत से ग्रसित थी, को कैंसर का सामना करना पड़ा। इस दर्दनाक अनुभव ने सागर को डॉक्टर बनकर नशा‑मुक्त जीवन को बढ़ावा देने और शिक्षा के महत्व को समझाने की दृढ़ इच्छा दिलाई।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that stories like Sagar’s inspire policy makers to expand scholarship schemes for under‑privileged Hindi‑medium students, bridging the gap between talent and opportunity.

"साक्षरता और योग्य शिक्षा के बिना सामाजिक प्रगति अधूरी है," शैक्षिक विशेषज्ञ डॉ. अजय सिंह ने कहा।
Did You Know?: भारत में हर साल लगभग 12 लाख छात्रों NEET लिखते हैं, लेकिन केवल 10% ही शीर्ष रैंक पाते हैं।

Frequently Asked Questions

Q: शिक्षा समर्थन योजना किन छात्रों के लिए उपलब्ध है?

A: यह योजना सरकारी स्कूलों के हिंदी‑माध्यमीय छात्रों को लक्ष्य बनाती है, विशेषकर आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के।

Q: सागर की अगली पढ़ाई की योजना क्या है?

A: वह अगले साल मेडिकल कॉलेज में प्रवेश लेकर डॉक्टर बनने की तैयारी करेंगे, साथ ही नशा‑मुक्त जागरूकता अभियान चलाएंगे।