लोकसभा ने 2026 में सुप्रीम कोर्ट (जजों की संख्या) संशोधन बिल पास किया, जिससे जजों की संख्या 34 से बढ़कर 38 हो गई। यह कदम बढ़ते मुकदमे बोझ को संभालने के लिए उठाया गया है, जबकि इससे सरकारी खर्च में भी वृद्धि होगी।

मुख्य बिंदु

  • जजों की संख्या 8 से 38 तक बढ़ी
  • लोकसभा ने संशोधन बिल पास किया, अब राज्यसभा में विचार होगा
  • वृद्धि से 14.04 करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च अनुमानित

नई दिल्ली (03 अगस्त 2026) – सुप्रीम कोर्ट के प्रमुख न्यायाधीश सहित जजों की कुल संख्या अब 34 से बढ़कर 38 हो जाएगी, क्योंकि The Supreme Court (Number of Judges) Amendment Bill, 2026 को लोकसभा ने बिना बहस के पारित कर दिया। इस बिल को आगे राज्यसभा में भेजा जाएगा और राष्ट्रपति की स्वीकृति के बाद लागू होगा।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

1950 में भारत के संविधान के लागू होने के बाद सुप्रीम कोर्ट में केवल 8 जज (1 मुख्य न्यायाधीश और 7 सदस्य) थे। तब से सात बार जजों की संख्या में वृद्धि हुई, 1956 में 11, 1960 में 14, 1977 में 18, 1986 में 26, 2008 में 31, 2019 में 34 और अब 2026 में 38। यह क्रमिक वृद्धि देश के न्यायिक बोझ में निरंतर बढ़ोतरी को दर्शाती है।

वित्तीय प्रभाव

सरकार का अनुमान है कि जजों की अतिरिक्त संख्या से वार्षिक 10.56 करोड़ रुपये और इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए एकबारगी 3.47 करोड़ रुपये का खर्च आएगा, कुल मिलाकर 14.04 करोड़ रुपये। यह खर्च नई बेंचों, सहायक स्टाफ़ और कोर्ट की सुविधाओं के विस्तार के लिए होगा।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that increasing the bench size is crucial to reduce the backlog of over 92,000 pending cases reported at the start of 2026. Faster case disposal will strengthen public confidence in the judiciary and align India’s legal system with global standards.

"बेंच का विस्तार न्यायिक प्रक्रिया को तेज़ करेगा और लंबित मामलों को कम करेगा," कहा वरिष्ठ न्यायालय विशेषज्ञ प्रो. अजय सिंह।
क्या आप जानते हैं?: 1950 में सुप्रीम कोर्ट के भवन में केवल 12 न्यायाधीशों के लिए ही जगह थी, जबकि आज 38 जजों को समायोजित करने के लिए नई मंजिलें बनाई जा रही हैं।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: क्या इस संशोधन के बाद सभी नए जज तुरंत नियुक्त होंगे?

उत्तर: नहीं, नियुक्ति प्रक्रिया में राष्ट्रपति की मान्यता और पारित पदों के लिए चयन प्रक्रिया शामिल होगी।

प्रश्न 2: इस वृद्धि से केस की सुनवाई की गति पर क्या प्रभाव पड़ेगा?

उत्तर: अतिरिक्त बेंचों से मामलों की सुनवाई तेज़ होगी, लेकिन वास्तविक प्रभाव समय के साथ स्पष्ट होगा।