सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को निर्देश दिया कि सभी सड़कों पर पादचारी के लिए स्पष्ट, निष्कर्षण‑मुक्त फुटपाथ होना अनिवार्य है। यह निर्णय शहरी सुरक्षा और मौलिक अधिकारों को सुदृढ़ करने के लिये एक महत्वपूर्ण कदम है।

मुख्य बिंदु

  • केंद्र को सभी सड़कों पर पादचारी मार्ग को स्पष्ट रूप से चिन्हित करने का आदेश मिला।
  • निर्णय को लागू करने के लिये दो हफ्तों की समय सीमा निर्धारित की गई।
  • पादचारी का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 19(1)(d) और 21 का हिस्सा माना गया।

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (3 अगस्त 2026) को एक बेंच द्वारा केंद्र को निर्देशित किया कि जहाँ भी सड़क है, वहाँ एक उचित रूप से चिन्हित, निष्कर्षण‑मुक्त पादचारी स्थान होना चाहिए। न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और आलोक अराधे ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के सामने यह मांग रखी।

न्यायालय ने कहा, “बिना बड़े निवेश के, केवल रस्सी या किसी साधन से पादचारी स्थान को स्पष्ट रूप से विभाजित करें और उसे अतिक्रमण से बचाएँ।” उन्होंने दो हफ्तों के भीतर संबंधित प्राधिकरणों को निर्देश देने का आदेश दिया।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

19 जून 2024 के एक पूर्व निर्णय में सुप्रीम कोर्ट ने पादचारी के फुटपाथ पर चलने के अधिकार को मौलिक अधिकार मानते हुए स्पष्ट किया था। इस निर्णय में कहा गया था कि यह अधिकार अनुच्छेद 19(1)(d) (आंदोलन की स्वतंत्रता) और अनुच्छेद 21 (जीवन और स्वतंत्रता) का भाग है, और यह मोटर वाहन के अधिकार से प्राथमिकता रखता है।

क्यों यह महत्वपूर्ण है

BozokMedia के विश्लेषण से स्पष्ट है कि शहरी विकास में पादचारी सुरक्षा अक्सर अनदेखी रहती है। निष्कर्षण‑मुक्त फुटपाथ न केवल दुर्घटनाओं को घटाते हैं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य और पर्यावरण को भी लाभ पहुँचाते हैं। यह आदेश शहरों को सड़कों के पुनः डिज़ाइन की ओर मजबूर करेगा, जिससे दीर्घकालिक आर्थिक लाभ भी होगा।

"पादचारी अधिकार को संरक्षित करना शहरी सुरक्षा की नींव है," कहा शहरी योजना विशेषज्ञ डॉ. अंशु वर्मा ने।
क्या आप जानते हैं?: भारत में लगभग 70% पादचारी मार्ग अनधिकृत निर्माण से अछूते नहीं हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: इस आदेश को लागू करने की जिम्मेदारी किसे सौंपी गई है?

उत्तर: केंद्र सरकार को निर्देशित किया गया है कि वह राज्य एवं स्थानीय निकायों को लागू करने के लिये निर्देश जारी करे।

प्रश्न 2: क्या इस आदेश का उल्लंघन करने पर कोई दंड निर्धारित किया गया है?

उत्तर: वर्तमान आदेश में दंड का उल्लेख नहीं है, पर भविष्य में गैर‑अनुपालन पर न्यायिक कार्रवाई संभव है।