मेहबूबा मुfti ने सातवीं वर्षगाँठ पर कहा कि भाजपा ने अनुच्छेद 370 को राम मंदिर की तरह लूट लिया। उन्होंने संविधान के पहले जम्मू‑काश्मीर के लिए धुंधला करने और जनता की चुप्पी की भी निंदा की।
मुख्य बिंदु
- भाजपा ने अनुच्छेद 370 और 35A को लूटने की तुलना राम मंदिर के अधिग्रहण से की।
- मेहबूबा मुfti ने संविधान के धुंधले होने की आलोचना की और जनता की चुप्पी को उजागर किया।
- जम्मू‑काश्मीर के कई युवाओं को जेल से रिहा करने की मांग की गई।
प्रोtest और बयान
7 अगस्त को जम्मू‑काश्मीर के अनुच्छेद 370 के निरसन की सातवीं वर्षगाँठ पर, पीडीयपी अध्यक्ष मेहबूबा मुfti ने श्रीनगर में प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा, "भाजपा ने राम मंदिर को लूटने की वही विधि अपनाकर हमारी विशेष स्थिति को छीन लिया।" उन्होंने भारतीय संविधान के तहत कश्मीर के अधिकारों को रेखांकित किया।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
अनुच्छेद 370 1949 में जम्मू‑काश्मीर को विशेष स्वायत्तता प्रदान करने के लिए जोड़ा गया था, जिससे राज्य को अपना संविधान, भूमि अधिकार और रोजगार के प्रावधान मिलते थे। 2019 में इस अनुच्छेद को निरस्त करने से पहले, यह भारत के संविधान का एक अनूठा हिस्सा था।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that the abrogation of Article 370 not only altered the constitutional fabric of India but also set a precedent for majoritarian politics to override regional safeguards, echoing concerns raised by constitutional scholars worldwide.
"The removal of Article 370 is a watershed moment that reshapes federal dynamics and raises serious questions about minority protections," says Dr. Asha Rao, constitutional law expert.
Did You Know?
Frequently Asked Questions
- क्या अनुच्छेद 370 का निरसन कश्मीर में सुरक्षा स्थिति को बदलेगा? विशेषज्ञों का मानना है कि इससे सामाजिक‑राजनीतिक तनाव बढ़ सकता है, लेकिन सुरक्षा उपायों की प्रभावशीलता अभी स्पष्ट नहीं है।
- मेहबूबा मुfti की मांगों में कौन‑सी प्रमुख चीज़ें शामिल हैं? वे अनुच्छेद 370 की वापसी, 35A की पुनर्स्थापना और जेल में बंद कश्मीरियों की रिहाई की मांग कर रही हैं।