राजस्थान हाई कोर्ट ने असराम को 20‑दिन की पैरोल दी, यह फैसला राज्य सरकार की आपत्तियों के बावजूद आया। कोर्ट ने जोखिम या जमानत उल्लंघन के कोई सबूत नहीं पाए।
मुख्य बिंदु
- असराम को 20‑दिन की पैरोल मिली
- राज्य सरकार ने आपत्ति जताई
- कोर्ट ने जोखिम का कोई प्रमाण नहीं पाया
कोर्ट का फैसला
राजस्थान हाई कोर्ट ने असराम को 20‑दिन की पैरोल दी, यह निर्णय तब आया जब अदालत ने कहा कि उनके जोखिम या जमानत उल्लंघन के कोई ठोस प्रमाण नहीं मिले। यह फैसला राज्य सरकार की तीव्र आपत्तियों के बावजूद आया, जिसने इस पैरोल को चुनौती देने की कोशिश की थी।
राज्य की आपत्तियाँ
राज्य सरकार ने कोर्ट के इस आदेश को अस्वीकार किया, तर्क देते हुए कि असराम के पुनरावृत्ति जोखिम और सार्वजनिक सुरक्षा को देखते हुए उन्हें जेल में ही रहना चाहिए। हालांकि, अदालत ने इन चिंताओं को असंवैधानिक माना और पैरोल जारी किया।
इतिहासिक पृष्ठभूमि
असराम, पूर्वी भारतीय सामाजिक कार्यकर्ता, को 2018 में कई यौन शोषण के मामलों में दोषी ठहराया गया था और 12 साल की सजा सुनाई गई थी। इस पैरोल निर्णय से पहले, कई बार उनकी जेल में स्वास्थ्य कारणों से रिहाई की गई थी, लेकिन यह पहली बार है जब हाई कोर्ट ने स्पष्ट रूप से जोखिम प्रमाण न मिलने पर पैरोल मंजूर की।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that this ruling could set a precedent for future parole decisions involving high‑profile convicts, potentially reshaping how Indian courts balance public safety with legal rights.
"पैरोल का यह आदेश न्यायिक स्वतंत्रता का प्रतीक है, लेकिन साथ ही यह सामाजिक जिम्मेदारी का भी परीक्षण है," कहा कानूनी विशेषज्ञ डॉ. राजीव सिंह ने।
Frequently Asked Questions
- क्या असराम को पैरोल के दौरान कोई प्रतिबंध होगा? हाँ, उन्हें पुलिस निगरानी में रखा जाएगा और जेल के बाहर जाने पर अनुमति लेनी होगी।
- राज्य सरकार इस फैसले को चुनौती दे सकती है? हाँ, वे उच्चतम न्यायालय में अपील कर सकते हैं, लेकिन वर्तमान में कोर्ट का आदेश मान्य है।