AIIMS दिल्ली की 32‑दिन की बहु‑विशेषज्ञीय योजना ने 209 किलोग्राम वजन वाले रोगी को 50 किलोग्राम घटाया, जिससे जीवनरक्षक बारीयाट्रिक सर्जरी संभव हुई। यह केस कम‑कैलोरी आहार, वायुमार्ग स्थिरीकरण और समन्वित देखभाल की महत्ता दर्शाता है।
मुख्य बिंदु
- 32 दिनों में वजन 209 किग्रा से 172 किग्रा तक घटा
- बहु‑विशेषज्ञीय टीम ने श्वास मार्ग को स्थिर किया
- वर्जित शल्यक्रिया से पहले 50 किग्रा घटाकर बारीयाट्रिक सर्जरी सफल
विवेक साक्षी, 32 वर्ष, ने AIIMS दिल्ली में एक कठोर प्री‑ऑपरेटिव प्रोटोकॉल के बाद 209 किलोग्राम से 160 किलोग्राम तक वजन घटाया और बारीयाट्रिक सर्जरी करवाई। उनका बॉडी मास इंडेक्स (BMI) 74 था और उन्हें गंभीर स्लीप एपनिया, श्वसन विफलता और कई सहवर्ती रोग थे।
जब वह 16 जून को AIIMS पहुँचा, तो डॉक्टरों ने कहा कि वह “ऑपरेबल नहीं” स्थिति में है। बहु‑विशेषज्ञीय टीम—शल्य चिकित्सक, एनेस्थीसियोलॉजिस्ट, इंटेंसिव केयर विशेषज्ञ, पोषण विशेषज्ञ और संक्रमण नियंत्रण अधिकारी— ने एक साथ काम किया। रोगी को 32 दिनों तक बहुत‑कम‑कैलोरी (VLCD) आहार पर रखा गया, जिससे उसका वजन 209 किग्रा से 172 किग्रा तक गिरा और पेट की परिधि 198 सेमी से 178 सेमी घटी।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि अत्यधिक मोटापे वाले रोगियों में बारीयाट्रिक सर्जरी को अक्सर “असंभव” माना जाता है। AIIMS की यह रणनीति दिखाती है कि श्वास मार्ग की स्थिरता, श्वसन अनुकूलन और कड़ाई से निगरानी किया गया कम‑कैलोरी आहार सर्जरी को सुरक्षित बना सकता है। यह मॉडल भारत में मोटापे से जुड़ी मृत्यु दर को घटाने में नई आशा प्रदान करता है।
“जब अत्यधिक वसा एक सक्रिय अंतःस्रावी अंग बन जाता है, तो केवल “कम खाएँ” कहने से वजन घटाना असंभव हो जाता है; समन्वित चिकित्सीय हस्तक्षेप आवश्यक है,” कहते हैं डॉ. मंजुनाथ मारुती पोल।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न: बारीयाट्रिक सर्जरी क्या है?
उत्तर: यह एक शल्यक्रिया है जो पेट को छोटा करती है, जिससे भोजन की मात्रा घटती है और वजन घटाने में मदद मिलती है।
प्रश्न: प्री‑ऑपरेटिव कम‑कैलोरी आहार क्यों आवश्यक है?
उत्तर: यह लीवर और वायुमार्ग को हल्का करता है, सर्जरी के दौरान जटिलताओं के जोखिम को कम करता है और रोगी को जल्दी पुनर्वास में मदद करता है।