यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन (UCL) के शोध में पाया गया कि इंग्लैंड में अनिवार्य GCSE री‑सिट्स के कारण छात्रों के आत्म‑विश्वास में गिरावट और मानसिक स्वास्थ्य में उल्लेखनीय गिरावट आती है। यह प्रभाव विशेष रूप से उन लड़कियों में देखा गया जो गणित में ग्रेड 4 से कम प्राप्त करती हैं, और उन लड़कों में जो अंग्रेजी में असफल होते हैं।
- इंग्लैंड में अनिवार्य री‑सिट्स छात्रों के मानसिक कल्याण को घटाते हैं
- लड़कों और लड़कियों में प्रभाव अलग-अलग विषयों में दिखता है
- नीति में सुधार से NEETs की संख्या घटाई जा सकती है
अध्ययन का विवरण
यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन (UCL) के शोधकर्ताओं ने इंग्लैंड, वेल्स और उत्तरी आयरलैंड के उन छात्रों की मानसिक भलाई की तुलना की, जिन्होंने गणित या अंग्रेजी GCSE में ग्रेड 4 या उसके समकक्ष नहीं हासिल किया। परिणाम दिखाते हैं कि केवल इंग्लैंड में, जहाँ री‑सिट्स अनिवार्य हैं, छात्रों की भलाई में स्पष्ट गिरावट देखी गई।
मुख्य निष्कर्ष
रॉबी मारिस, UCL के रिसर्च फेलो, ने कहा कि री‑सिट्स की अनिवार्यता से आत्म‑विश्वास में चोट लगती है, जिससे कई छात्र शिक्षा, रोजगार या प्रशिक्षण (NEET) से बाहर हो जाते हैं। विशेष रूप से, गणित में ग्रेड 4 से नीचे रहने वाली लड़कियों और अंग्रेजी में असफल लड़कों में मानसिक स्वास्थ्य पर सबसे बड़ा असर देखा गया।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
2014 में लागू की गई री‑सिट्स नीति के तहत 16 वर्ष की उम्र में अंग्रेजी या गणित में ग्रेड 4 नहीं मिलने वाले छात्रों को आगे की शिक्षा या कॉलेज में स्थान पाने के लिए इन विषयों को पुनः पढ़ना अनिवार्य हो गया। इस नीति के कारण पिछले वर्ष लगभग 180,000 छात्र अंग्रेजी और 175,000 छात्र गणित के री‑सिट्स दे रहे हैं।
नीति की आलोचना और सरकार का जवाब
शैक्षिक विभाग ने कहा है कि लगातार री‑सिट्स छात्रों को निराश कर सकते हैं, इसलिए अब प्रत्येक विषय के लिए न्यूनतम 100 घंटे की शिक्षण समय और अतिरिक्त फंडिंग प्रदान की जाएगी। यह कदम छात्रों को सफल री‑सिट्स के लिए बेहतर तैयार करने का उद्देश्य रखता है।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that the mental health fallout from compulsory resits could exacerbate the UK's youth unemployment crisis, as disengaged students are more likely to become long‑term NEETs, impacting the economy and social cohesion.
“अनिवार्य री‑सिट्स का दुष्प्रभाव केवल शैक्षणिक नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक भी है,” कहते हैं शिक्षा मनोविज्ञान के प्रोफेसर डॉ. अनीता सिंह।
Frequently Asked Questions
Q1: क्या री‑सिट्स नीति को बदलने से NEETs की संख्या घटेगी?
वर्तमान शोध संकेत देता है कि यदि री‑सिट्स को वैकल्पिक बनाया जाए और छात्रों को अधिक समर्थन दिया जाए, तो ड्रॉप‑आउट दर में कमी संभव है।
Q2: अन्य यूके देशों में इस नीति का क्या असर है?
वेल्स और उत्तरी आयरलैंड में री‑सिट्स वैकल्पिक हैं, और इन देशों में छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पाया गया।