एक नई रिपोर्ट के अनुसार, इस साल भारतीय छात्रों के अमेरिकी स्नातक कोर्सों के लिए आवेदन 15% घटे हैं, मुख्य कारण कड़े वीज़ा नियम और बढ़ती प्रतिस्पर्धा हैं। यह रुझान अमेरिकी उच्च शिक्षा के राजस्व और द्विपक्षीय संबंधों पर दीर्घकालिक असर डाल सकता है।
- भारतीय अंडरग्रेजुएट आवेदन 15% घटे
- कड़े अमेरिकी वीज़ा नियम मुख्य कारण
- US हाईएड सेक्टर को संभावित राजस्व हानि
परिणाम और वर्तमान स्थिति
NDTV द्वारा प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, इस शैक्षणिक वर्ष में भारतीय छात्रों द्वारा अमेरिकी कॉलेजों में स्नातक कार्यक्रमों के लिए किए गए आवेदन 15% कम हो गए हैं। यह गिरावट Common App द्वारा संकलित डेटा और विभिन्न शिक्षा पोर्टलों के आँकड़ों से पुष्टि हुई है।
भारत से US में पढ़ाई की इच्छा हमेशा उच्च रही है, लेकिन हाल के वर्षों में वीज़ा प्रक्रिया में कड़ाई और अनुमोदन दर में गिरावट ने छात्रों को विकल्प पुनः विचार करने के लिए मजबूर किया है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
पिछले दशक में भारतीय छात्रों का US में स्नातक स्तर पर प्रवेश लगातार बढ़ता रहा, 2015‑2020 में वार्षिक आवेदन 30% से अधिक बढ़े। 2020 के बाद, कोविड‑19 महामारी और उसके बाद के नीति परिवर्तन ने इस प्रवाह को उलट दिया।
विशेष रूप से 2022 में लागू हुए कड़े वीज़ा नियम, जैसे कि SEVIS शुल्क में वृद्धि और साक्षात्कार प्रक्रिया में कड़े मानदंड, ने इस गिरावट को तेज किया।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that a sustained decline in Indian enrollments could shave billions off US university revenues, affect campus diversity, and reshape international education policies.
"यदि भारतीय छात्रों की संख्या घटती रहती है, तो अमेरिकी विश्वविद्यालयों को वैकल्पिक बाजारों की खोज करनी पड़ेगी," कहते हैं शिक्षा विशेषज्ञ डॉ. अंजली मेहता।
भविष्य की संभावनाएँ
यदि वीज़ा नीतियों में सुधार नहीं हुआ, तो भारतीय छात्रों का प्रवाह अन्य देशों, जैसे कनाडा और ऑस्ट्रेलिया, की ओर मुड़ सकता है। इससे US की शिक्षा निर्यात क्षमता पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ेगा।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: क्या यह गिरावट केवल स्नातक स्तर तक सीमित है?
उत्तर: नहीं, हालिया डेटा दिखाता है कि स्नातकोत्तर और शोध स्तर पर भी भारतीय आवेदकों की संख्या में कमी देखी गई है।
प्रश्न 2: क्या अमेरिकी विश्वविद्यालय इस कमी को कम करने के लिए कोई कदम उठा रहे हैं?
उत्तर: कई संस्थान स्कॉलरशिप बढ़ा रहे हैं और वैकल्पिक वीज़ा मार्गों की खोज कर रहे हैं, परन्तु नीति स्तर पर परिवर्तन अभी तक स्पष्ट नहीं है।