भारत का सिक्योरिटीज़ एंड एक्सचेंज बोर्ड (SEBI) ने हेंडेनबर्ग रिसर्च की रिपोर्ट से जुड़े शॉर्ट‑सेलिंग ट्रेड्स पर सुनवाई शुरू की है। इस मामले में 22 मिलियन डॉलर से अधिक के लाभ की जांच चल रही है।

  • SEBI ने हेंडेनबर्ग रिसर्च से जुड़े शॉर्ट‑सेलिंग ट्रेड्स पर सुनवाई शुरू की है।
  • 22 मिलियन डॉलर से अधिक के लाभ पर जांच जारी है, जिसमें विदेशी इकाइयाँ और मॉरीशस फंड शामिल हैं।
  • नियामक कार्रवाई में विदेशी दिवाला प्रक्रियाओं को रोक कर संपत्ति सुरक्षित करने का कदम शामिल है।

4 सितंबर, 2026 को भारत के सिक्योरिटीज़ एंड एक्सचेंज बोर्ड (SEBI) ने घोषणा की कि उसने हेंडेनबर्ग रिसर्च की 2023 की रिपोर्ट से जुड़ी शॉर्ट‑सेलिंग गतिविधियों पर औपचारिक सुनवाई शुरू कर दी है।

हेंडेनबर्ग रिसर्च ने 2023 में अडानी ग्रुप पर सिक्योरिटीज़ कानून का उल्लंघन करने का आरोप लगाया था, जिसके बाद संबंधित शेयरों में भारी बिकवाली हुई। अडानी ग्रुप ने इन आरोपों से इनकार किया और SEBI ने इस रिपोर्ट को अस्वीकार कर दिया।

सुनवाई के दौरान SEBI ने बताया कि यू.एस. आधारित किंगडन कैपिटल मैनेजमेंट ने 2023 में हेंडेनबर्ग की रिपोर्ट आने से पहले अडानी से संबंधित स्टॉक्स पर शॉर्ट पोजीशन बनाई थी। ये ट्रेड्स क India ओपर्च्युनिटीज़ फंड क्लास एफ के माध्यम से किये गए थे, जो मॉरीशस आधारित फंड है और कोटक इंटरनेशनल से जुड़ा हुआ है।

SEBI का दावा है कि इन शॉर्ट ट्रेड्स से छह संस्थाओं ने कुल 22.25 मिलियन डॉलर के लाभ कमाए। इन लाभों को फंड में जमा किया गया था, जबकि यह स्पष्ट नहीं है कि उन्हें किंगडन द्वारा वितरित किया गया या नहीं।

SEBI ने मॉरीशस के सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया कि वह फंड के एसेट्स को किसी भी तरह के वितरण या ट्रांसफर से रोके, ताकि नियामक के आदेश के अनुसार इन लाभों की वसूली हो सके। फंड के प्रबंधन के लिए क्वांटुमा नामक पुनर्गठन फर्म के निदेशक को रिसीवर नियुक्त किया गया।

Why This Matters

बोझोकमीडिया विश्लेषण के अनुसार, यह मामला SEBI की विदेशी इकाइयों पर कार्रवाई करने की दृढ़ता को दर्शाता है। यह वैश्विक निवेशकों को यह स्पष्ट संदेश देता है कि भारतीय बाजार में अवैध शॉर्ट‑सेलिंग पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी।

"यह केस SEBI के वैश्विक बाजार दुरुपयोग पर बढ़ते कदम को उजागर करता है, जो निवेशकों के लिए एक स्पष्ट संदेश है।" — डॉ. आर. पटेल, मार्केट विश्लेषक
Did You Know?: किंगडन कैपिटल द्वारा उपयोग की गई शॉर्ट‑सेलिंग रणनीति मॉरीशस‑आधारित फंड के माध्यम से शेयर उधार लेने पर आधारित है, जो हाल के वर्षों में हेज फंड्स के बीच लोकप्रिय हो गई है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: SEBI का इस मामले में अधिकार क्षेत्र क्यों है, जबकि सभी पक्ष विदेशी हैं?

उत्तर: SEBI का अधिकार क्षेत्र तब लागू होता है जब ट्रेड्स भारतीय बाजार में किये गए हों, चाहे ट्रेडर या फंड कहीं भी स्थित हो।

प्रश्न 2: क्या किंगडन कैपिटल को इस मामले में दंडित किया जा सकता है?

उत्तर: हाँ, यदि SEBI यह साबित कर सकता है कि ट्रेड्स गैर‑सार्वजनिक जानकारी पर आधारित थे, तो किंगडन पर भी नियामक कार्रवाई की जा सकती है।