केंद्र ने दार्जिलिंग में गोरखा मुद्दे के स्थायी समाधान के लिए एक नई समिति का गठन किया। अमित शाह ने सभी मांगों को संविधान के दायरे में सुलझाने का आश्वासन दिया, जबकि इतिहासकार इस कदम को दीर्घकालिक शांति की दिशा में महत्वपूर्ण मानते हैं।
- केंद्र ने गोरखा मुद्दे के लिए स्थायी समाधान हेतु समिति बनाई।
- अमित शाह ने संविधान के ढाँचे में समाधान का आश्वासन दिया।
- नई समिति पंकज कुमार सिंह के नेतृत्व में, अंतिम समझौता तैयार करेगी।
22 अगस्त को दार्जिलिंग के सुकना में हुए त्रिपक्षीय बैठक में केन्द्र, पश्चिम बंगाल और गोरखा नेताओं ने स्थायी राजनीतिक समाधान पर चर्चा की। यह बैठक केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के अध्यक्षत्व में हुई, जिसमें पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेन्दु अधिकारी, गोरखा जनमुक्ति मोर्चा (GJM) के बिमल गुरुंग, और कई अन्य प्रमुख प्रतिनिधि शामिल थे।
हिन्दुस्तान के गृह मंत्रालय ने बताया कि बातचीत में पहाड़ी जनसंख्या की अलग पहचान, संविधान के भीतर स्थायी समाधान और विकासात्मक सहायता जैसी मांगें सामने रखी गईं। शाह ने स्पष्ट किया कि समाधान "भारत के संविधान के छत्रछाया में" होना चाहिए।
समिति का नेतृत्व पंकज कुमार सिंह करेंगे, जो दार्जिलिंग, डूर्स और तराई के लिये केन्द्र के इंटरलोक्यूटर और पूर्व उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार हैं। सिंह, एक सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी और पूर्व बीएसएफ प्रमुख, अक्टूबर 2025 में इस पद पर नियुक्त हुए थे। उनकी समिति प्रस्तावित समझौते की रूपरेखा तैयार करेगी और कार्यवाही के तरीके तय करेगी।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
दार्जिलिंग में गोरखा आंदोलन का इतिहास चार दशकों से अधिक पुराना है। 1988 के गोरखा समझौते ने दार्जिलिंग गोरखा हिल काउंसिल (DGHC) की स्थापना की, जबकि 2011 में गोरखा टेरिटोरियल एडमिनिस्ट्रेशन (GTA) का गठन हुआ। दोनों संस्थानों को गोरखा समुदाय ने सीमित शक्तियों, वित्तीय स्वायत्तता की कमी और संवैधानिक सुरक्षा की अनुपस्थिति के कारण निरंतर असंतोष व्यक्त किया है।
बीजेपी ने राज्य चुनाव के दौरान गोरखा मुद्दे को छह महीनों में हल करने का वादा किया था। हालाँकि, 22 अगस्त की बैठक ने अभी तक अंतिम समाधान का स्वरूप नहीं बताया, लेकिन संभावनाएँ अधिक स्वायत्तता या नई संवैधानिक व्यवस्था की ओर इशारा करती हैं।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that a constitution‑based settlement could end decades‑long unrest, unlock federal funding for infrastructure, and set a precedent for other hill‑region agitations across India.
"एक संवैधानिक समझौता ही दार्जिलिंग में स्थायी शांति की एकमात्र राह है," एक वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक ने कहा।
शाह ने यह भी आश्वासन दिया कि केंद्र अतिरिक्त विकासात्मक निधि प्रदान करेगा, जिससे पहाड़ी इलाकों में सड़कों, स्वास्थ्य सुविधाओं और शिक्षा संस्थानों का निर्माण तेज़ होगा। इस कदम से न केवल स्थानीय राजनीति में संतुलन आएगा, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी कई समान मांगों वाले क्षेत्रों को प्रेरणा मिलेगी।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: स्थायी राजनीतिक समाधान में क्या शामिल होगा?
उत्तर: समाधान में प्रशासनिक स्वायत्तता, संवैधानिक पहचान, और आर्थिक विकास के लिये विशेष प्रावधान शामिल हो सकते हैं, लेकिन सभी को भारतीय संविधान के भीतर रखा जाएगा।
प्रश्न 2: नई समिति का मौजूदा DGHC और GTA पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर: समिति का काम मौजूदा संस्थाओं की सीमाओं को पुनः परिभाषित करना और उनके अधिकारों को संवैधानिक रूप से सुदृढ़ करना है, जिससे भविष्य में दोहराव वाले संघर्षों की संभावना कम होगी।