कोयंबत्रो के हाउसिंग बोर्ड अलॉटियों ने सुप्रीम कोर्ट और मध्यस्थता ट्रिब्यूनल के फैसलों के अनुसार जमीन की कीमत तय करने के लिए सरकार को तत्काल आदेश देने की मांग की है। यदि इन मांगों को नहीं माना गया तो वे अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल करेंगे।
- अलॉटियों ने 31.98 एकड़ के लिए ₹6,000 प्रति सेंट और 33.34 एकड़ के लिए ₹200 प्रति सेंट की नई कीमत की मांग की।
- सुप्रीम कोर्ट और मध्यस्थता ट्रिब्यूनल के आदेशों के अनुसार बिक्री डीड जारी करने की माँग की गई।
- यदि मांगें पूरी नहीं हुईं तो अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल का जोखिम।
भूख हड़ताल की घोषणा
गणपति नगर वेत्तु अधिकारियालाल नलाह पाथु कप्पु संघ ने कोयंबत्रो में एक दिन की टोकन भूख हड़ताल की घोषणा की, साथ ही यदि उनकी माँगें नहीं मानी गईं तो अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल का इशारा दिया। यह कदम 33‑साल पुरानी जमीन मूल्य विवाद को सुलझाने के लिए उठाया गया है।
मुख्य माँगें
संघ ने सरकार से तुरंत आदेश जारी करने की माँग की है जिससे अंतिम संशोधित जमीन मूल्य 31.98 एकड़ के लिये ₹6,000 प्रति सेंट और 33.34 एकड़ के लिये ₹200 प्रति सेंट स्थापित हो सके। साथ ही उन अलॉटियों को बिक्री डीड जारी करने की भी माँग की गई है जिन्होंने अब तक डीड नहीं प्राप्त किया है।
कानूनी पृष्ठभूमि
सुप्रीम कोर्ट तथा मध्यस्थता ट्रिब्यूनल ने पिछले कुछ वर्षों में इस विवाद को सुलझाने के लिए स्पष्ट निर्देश दिए थे। उन निर्देशों के बावजूद जमीन मूल्य निर्धारण और डीड जारी करने में देरी बनी हुई है, जिससे अलॉटियों को आर्थिक नुकसान हुआ है।
वित्तीय प्रतिपूर्ति और सॉफ़्टवेयर त्रुटि
संघ ने अतिरिक्त रूप से 6% ब्याज के साथ अवैध रूप से वसूले गए अतिरिक्त राशि की रिफ़ंड की माँग की है और ‘FoxPro’ सॉफ़्टवेयर में हुई त्रुटि के कारण लगाए गए ब्याज को हटाने की भी मांग की है।
सरकारी कार्रवाई का आग्रह
संघ ने 28 अगस्त को विधानसभा के अनुदान बहस में इस मुद्दे को स्वतः (suo motu) उठाने और सार्वजनिक फंडों के नुकसान की जांच के लिए एक विशेष जांच टीम (SIT) गठित करने की मांग की है।
पंचमी जमीन का मुद्दा
इसी समय, मेट्टुपलयम के छह क्षेत्रों के 100 से अधिक लोग मुफ्त घर‑साइट पट्टा और पंचमी जमीन की पुनर्स्थापना की मांग कर रहे हैं। वे दावा करते हैं कि पिछले पाँच‑छह वर्षों में कई याचिकाएँ दायर करने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
कोयंबत्रो हाउसिंग बोर्ड अलॉटियों का यह भूमि मूल्य विवाद 1993 में शुरू हुआ था, जब पहली बार योजना के तहत जमीन आवंटित की गई थी। तब से कई बार अदालतों में याचिकाएँ दायर की गईं, लेकिन जमीन मूल्य निर्धारण और डीड जारी करने में लगातार देरी हुई। पिछले दो दशकों में विभिन्न राजनीतिक दलों ने इस मुद्दे को उठाया, परन्तु स्थायी समाधान नहीं निकला।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that prolonged land‑price disputes not only erode public trust in housing authorities but also set a precedent for similar grievances across Tamil Nadu, potentially influencing upcoming state elections.
"यदि सरकार तुरंत कार्य नहीं करती, तो यह न केवल अलॉटियों के आर्थिक बोझ को बढ़ाएगा बल्कि सामाजिक असंतोष भी उत्पन्न करेगा," विशेषज्ञ ने टिप्पणी की।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: अलॉटियों को कौन से कानूनी अधिकार प्राप्त हैं?
उत्तर: सुप्रीम कोर्ट और मध्यस्थता ट्रिब्यूनल के आदेशों के तहत उन्हें निर्धारित कीमत पर जमीन मिलने और बिक्री डीड प्राप्त करने का अधिकार है।
प्रश्न 2: यदि भूख हड़ताल जारी रहती है तो सरकार पर क्या दायित्व है?
उत्तर: सरकार को अदालत के आदेशों का पालन करते हुए तत्काल आदेश जारी करना और आवश्यक वित्तीय प्रतिपूर्ति प्रदान करना आवश्यक है।