दिल्ली हाई कोर्ट ने 2024 दिल्ली हाई ज्यूडिशियल सर्विस (DHJS) प्रीलिमिनरी परीक्षा में एक प्रश्न को हटाने को लेकर दायर याचिका को अस्वीकार कर दिया। कोर्ट ने बताया कि प्रश्न को पुनर्स्थापित करने पर भी आवेदक के अंक 77 कट‑ऑफ से नीचे रहेंगे।
- धारा‑60 को हटाने की याचिका खारिज
- अतिरिक्त 1 अंक से भी कट‑ऑफ नहीं पहुँचा
- उम्र में रियायत की मांग भी अस्वीकृत
दिल्ली हाई कोर्ट ने 24 अगस्त 2026 को एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया, जिसमें 2024 के DHJS प्रीलिमिनरी परीक्षा में प्रश्न संख्या 60 को हटाने को लेकर दायर याचिका को खारिज कर दिया गया। अदालत ने कहा कि प्रश्न को पुनः शामिल करने पर भी याचिकाकर्ता के कुल अंक 75.75 से 76.75 तक ही बढ़ेंगे, जो निर्धारित 77 अंक के कट‑ऑफ से कम है।
पृष्ठभूमि
फरवरी 2025 में जारी नोटिस के तहत चार प्रश्नों को अस्पष्टता के कारण हटा दिया गया था, जिसमें प्रश्न संख्या 60 भी शामिल था। याचिकाकर्ता ने दावा किया कि मूल उत्तर कुंजी में विकल्प (2) सही था, परंतु नोटिस ने इसे गलत या अस्पष्ट माना और हटा दिया। हजारों उम्मीदवारों में से केवल आठ ने इस प्रश्न को चुनौती दी, और कोई भी इसे अस्पष्ट नहीं मानता था।
न्यायिक तर्क
जज वी. कामेश्वर राव और मनमीत प्रतिम सिंह अरोड़ा की बेंच ने कहा कि मुख्य मुद्दा यह था कि प्रश्न को पुनर्स्थापित करने से भी याचिकाकर्ता मेन परीक्षा में बैठ नहीं पाएगा। कोर्ट ने यह भी नोट किया कि किसी अन्य उम्मीदवार ने इस निर्णय को चुनौती नहीं दी।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows कि इस प्रकार के फैसले न्यायिक परीक्षाओं की पारदर्शिता और उत्तर कुंजियों की विश्वसनीयता पर प्रश्न उठाते हैं, जिससे भविष्य में उम्मीदवारों के भरोसे को प्रभावित किया जा सकता है।
“परीक्षा बोर्ड को प्रश्नों की अस्पष्टता के मामलों में अधिक स्पष्ट मानदंड अपनाने चाहिए,” एक्सपर्ट कानूनी विश्लेषक ने कहा।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: क्या प्रश्न संख्या 60 को फिर से जोड़ना संभव है?
उत्तर: अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा है कि पुनः जोड़ने से भी याचिकाकर्ता का स्कोर कट‑ऑफ से नीचे रहेगा, इसलिए यह संभव नहीं है।
प्रश्न 2: क्या उम्र में रियायत के लिए कोई अन्य उपाय है?
उत्तर: वर्तमान में कोई कानूनी आधार नहीं मिला है; उम्मीदवार को सामान्य आयु सीमा का पालन करना होगा।