भारत का शहद उत्पादन पिछले वर्ष से 5% बढ़ा, फिर भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें 20% तक गिर रही हैं। रिपोर्टों के अनुसार चीन और टर्की के उत्पादन रुझान अलग हैं, जबकि ब्राज़ील के शहद की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं।
- 2026 में भारत का शहद उत्पादन 1.54 लाख टन तक पहुंच सकता है
- निर्यात कीमतों में लगभग 20% गिरावट की संभावना
- ब्राज़ील का शहद सबसे महँगा, कीमत में लगातार बढ़ोतरी
भारत में शहद उत्पादन निरंतर बढ़ रहा है, 2025 में 1.46 लाख टन से 2026 में अनुमानित 1.54 लाख टन तक पहुंचने की उम्मीद है। यह वृद्धि चीन के बाद विश्व स्तर पर दूसरे स्थान पर रखती है, जहाँ 2026 में उत्पादन 5.50 लाख टन तक पहुंचने का अनुमान है।
हालांकि उत्पादन में बढ़ोतरी देखी जा रही है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय शहद को उचित मूल्य नहीं मिल रहा। APEDA‑CRISIL की संयुक्त रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में भारतीय शहद की निर्यात कीमत लगभग $2,050 प्रति टन थी, जबकि 2026 में यह $1,645 प्रति टन तक गिर सकती है, जिससे 20% तक की कमी संभव है।
दूसरी ओर, ब्राज़ील का शहद सबसे महँगा बना हुआ है। 2025 में $3,240 प्रति टन से बढ़कर 2026 में $3,390 प्रति टन तक पहुंचने की संभावना है। चीन और यूक्रेन के शहद की कीमतों में भी मामूली गिरावट की उम्मीद है।
Historical Background
पिछले दो दशकों में भारत का मधुमक्खी पालन नीति‑सहायता, फसल विविधीकरण और ग्रामीण आय वृद्धि के लिए एक प्रमुख स्तंभ रहा है। 2010 के बाद एपीडिया (APEDA) ने कई FPO (किसान उत्पादक संगठन) को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप उत्पादन करने हेतु प्रशिक्षण एवं विपणन सहायता प्रदान की।
इन प्रयासों ने 2015‑2020 के बीच उत्पादन में 30% की वृद्धि को प्रेरित किया, परन्तु वैश्विक बाजार में ब्रांडिंग और गुणवत्ता मानकों की कमी ने निर्यात मूल्य को स्थिर रखा।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows कि भारतीय शहद की कीमतों में गिरावट न केवल किसानों की आय को प्रभावित करेगी, बल्कि देश की खाद्य‑सुरक्षा और निर्यात संतुलन पर भी दीर्घकालिक असर पड़ेगा। यदि मूल्य‑संकट को दूर नहीं किया गया तो मधुमक्खी पालन में निवेश घट सकता है, जिससे कृषि विविधीकरण की योजना जोखिम में पड़ सकती है।
"उच्च गुणवत्ता वाले भारतीय शहद को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप पैकेजिंग और प्रमाणन में निवेश करना आवश्यक है, तभी कीमतों में स्थिरता आएगी," कहा कृषि अर्थशास्त्री डॉ. अंजली राव।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: क्या भारतीय शहद के निर्यात मूल्य में गिरावट का कारण गुणवत्ता है?
उत्तर: मुख्य कारणों में प्रमाणन की कमी, पैकेजिंग मानकों का न होना और ब्राज़ील व यूएसए जैसे बड़े निर्यातकों की प्रीमियम प्राइसिंग रणनीति शामिल हैं।
प्रश्न 2: सरकार किस तरह से शहद निर्यात को प्रोत्साहित कर रही है?
उत्तर: एपीडिया के सहयोग से कई FPO को विदेशी बाजार में प्रवेश के लिए मार्केटिंग, गुणवत्ता मानक प्रशिक्षण और वित्तीय सब्सिडी प्रदान की जा रही है।