वाणिज्य मंत्री पियूष गोयल ने बताया कि भारत 8‑9 अतिरिक्त ब्लॉक्स के साथ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर बातचीत कर रहा है, जिससे देश का व्यापारिक कवरेज 75% वैश्विक व्यापार तक बढ़ेगा। यह कदम भारत को विश्व बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
- भारत 8‑9 नई ब्लॉक्स के साथ FTA पर वार्ता कर रहा है
- उद्देश्य वैश्विक व्यापार के 75% हिस्से को कवर करना
- वाणिज्य मंत्री पियूष गोयल ने इस पहल की घोषणा की
वाणिज्य और उद्योग मंत्री पियूष गोयल ने हाल ही में एक साक्षात्कार में कहा कि भारत वर्तमान में अतिरिक्त 8‑9 ब्लॉक्स के साथ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की बातचीत में लगा हुआ है। इस रणनीति का लक्ष्य वैश्विक व्यापार के लगभग 75 % हिस्से को कवर करना है, जिससे भारतीय निर्यातकों को नई बाजारों तक आसान पहुँच मिलेगी।
विस्तृत वार्ता का दायरा
इन ब्लॉक्स में एशिया‑पैसिफिक, अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और यूरोप के संभावित साझेदार शामिल हैं। गोयल ने बताया कि भारत ने पहले ही कई द्विपक्षीय समझौतों को लागू किया है, और अब बहुपक्षीय स्तर पर विस्तार करने की दिशा में काम कर रहा है।
इतिहासिक पृष्ठभूमि
भारत ने 1990 के दशक में आर्थिक उदारीकरण के बाद से धीरे‑धीरे अपना व्यापारिक नेटवर्क विस्तारित किया है। 2000 के बाद से कई द्विपक्षीय FTAs के साथ, देश ने निर्यात‑आधारित उद्योगों को प्रोत्साहन दिया है। अब बहुपक्षीय FTAs की ओर बढ़ना एक रणनीतिक बदलाव है, जिसका उद्देश्य वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में भारत की भूमिका को मजबूत करना है।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that securing FTAs covering 75 % of global trade could boost India's export growth by up to 15 % over the next five years, enhancing its bargaining power in multilateral forums and attracting foreign direct investment.
"यदि भारत 75 % वैश्विक व्यापार को कवर करने वाले FTAs को सफलतापूर्वक लागू कर लेता है, तो यह उसकी आर्थिक संप्रभुता को नया आयाम देगा," कहा अंतर्राष्ट्रीय व्यापार विशेषज्ञ डॉ. रजत सिंह ने।
Frequently Asked Questions
Q1: कौन‑से ब्लॉक्स के साथ भारत बातचीत कर रहा है?
A1: आधिकारिक तौर पर सूची नहीं जारी हुई है, लेकिन संभावित साझेदारों में ASEAN, Mercosur, African Continental Free Trade Area (AfCFTA) और यूरोपीय संघ शामिल हैं।
Q2: FTAs के तहत भारतीय निर्यातकों को क्या लाभ मिलेंगे?
A2: टैरिफ़ में कमी, गैर‑टैरिफ़ बाधाओं का हटना, और बाजार प्रवेश के आसान नियमों से भारतीय कंपनियों को व्यापक अवसर मिलेंगे।