शिवशक्ति सुगर्स ने 7,500 टन/दिन क्षमता वाले मौजूदा सिरप प्लांट को प्लांटेशन व्हाइट शुगर उत्पादन में बदलने के लिए SED को इंटीग्रेटेड प्रोसेस हाउस समाधान दिया है। यह परियोजना ऊर्जा दक्षता, प्रक्रिया स्थिरता और उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय सुधार लाएगी।
- SED डिजाइन, इंजीनियरिंग, उपकरण आपूर्ति और कमीशनिंग का पूर्ण समाधान देगा।
- उपकरण 15 सितंबर तक भेजे जाएंगे; प्लांट का पूर्ण कमिशनिंग 31 अक्टूबर 2026 को निर्धारित है।
- नयी तकनीक कम‑ग्रेड भाप का बेहतर उपयोग और प्रक्रिया नियंत्रण को बढ़ावा देती है।
परियोजना का विवरण
शिवशक्ति सुगर्स लिमिटेड, बेलगावी, कर्नाटक, ने SED (Spray Engineering Devices Limited) को 7,500 टन/दिन (TCD) क्षमता वाले मौजूदा सिरप उत्पादन प्लांट में इवैपोरेटर स्टेशन को सुदृढ़ करने और शुगर क्रिस्टलीकरण खंड जोड़ने का काम सौंपा है। इस कदम से प्लांट 340 टन/घंटा (TCH) प्लांटेशन व्हाइट शुगर उत्पादन में परिवर्तित होगा, जो उद्योग में दक्षता और आधुनिकता के नए मानक स्थापित करेगा।
SED के प्रबंध निदेशक विवेक वर्मा ने कहा, “हमारी इंजीनियरिंग केवल उपकरण आपूर्ति नहीं, बल्कि प्रदर्शन की जिम्मेदारी है। शिवशक्ति सुगर्स के साथ हम प्रक्रिया डिजाइन, ऊर्जा दक्षता और संचालन नियंत्रण को संयोजित करके बड़े पैमाने पर विश्वसनीय प्रणाली बनाते हैं।”
प्रौद्योगिकी पैकेज की मुख्य विशेषताएँ
प्रस्तावित पैकेज में कंडेन्सेट जूस हीटर, फॉलिंग फ़िल्म इवैपोरेटर, कंडेन्सेट हीट रीकवरी, स्प्रे कंटिन्यूअस पैन (A, B, C मैसेक्यूट) और वैक्यूम, सीलिंग व वर्टिकल क्रिस्टलीज़र सहित ऑटोमेशन सिस्टम शामिल है। दो 5,000 m² फॉलिंग फ़िल्म इवैपोरेटर, तीन स्प्रे कंटिन्यूअस पैन (110 TPH, 45 TPH, 35 TPH) और लो‑ग्रेड मैसेक्यूट के लिए वर्टिकल क्रिस्टलीज़र स्थापित किए जाएंगे।
यह तकनीक कम‑ग्रेड भाप को अधिक प्रभावी ढंग से उपयोग करती है और प्रक्रिया नियंत्रण को सुधारती है। स्प्रे कंटिन्यूअस पैन में व्यक्तिगत चैम्बर नियंत्रण से वाष्प, तापमान, स्तर और स्थिरता को लगातार मॉनिटर किया जा सकता है, जबकि इवैपोरेटर सिस्टम में रीसर्कुलेशन और ऑनलाइन रासायनिक सफाई की सुविधा है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
भारत में शुगर उद्योग का इतिहास 19वीं सदी से शुरू होता है, जब पहला शुगर मिल 1830 के दशक में स्थापित हुआ। दशकों में, भारतीय शुगर मिलें मुख्यतः कच्चा शुगर (सिरप) उत्पादन करती थीं, जिससे ऊर्जा क्षति और कम रिटर्न होते थे। 2000 के बाद, प्लांटेशन व्हाइट शुगर की मांग में तेज़ी आई, जिससे कई कंपनियों ने उन्नत क्रिस्टलीकरण तकनीक अपनाई। इस संदर्भ में, शिवशक्ति सुगर्स का 7,500 TCD प्रोजेक्ट ऊर्जा दक्षता और उत्पादन क्षमता को बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that the integration of crystallization and evaporation modules in a single process house can cut energy consumption by up to 15 % and improve sugar recovery rates, giving Indian manufacturers a competitive edge in the global sugar market.
“SED’s modular approach sets a new benchmark for cost‑effective sugar processing in emerging economies,” says Dr. Ananya Rao, senior analyst at AgriTech Insights.
Frequently Asked Questions
Q1: इस प्रोजेक्ट की कुल लागत कितनी है?
A1: कंपनी ने अभी तक कुल परियोजना लागत का खुलासा नहीं किया है, लेकिन यह बताया गया है कि यह निवेश लागत‑प्रभावशीलता को ध्यान में रखकर किया गया है।
Q2: नई तकनीक कब तक पूरी तरह चलने लगेगी?
A2: उपकरणों की डिलीवरी 15 सितंबर 2026 तक पूरी होने की उम्मीद है, और पूर्ण कमिशनिंग 31 अक्टूबर 2026 को निर्धारित है।