उत्तरी प्रदेश में छात्र विरोधों की लहर के बीच, कन्नौज पुलिस ने आरोप लगाया कि बिस्किट के लालच में छात्र विरोध में शामिल हुए। इसी समय, देओरिया में एक कार्यकर्ता को 'खुराब' स्कूल कैंपस का वीडियो पोस्ट करने पर FIR में जोड़ा गया।

  • कन्नौज में छात्रों को बिस्किट से लुभाया गया
  • विरोध के बाद पुलिस ने FIR दर्ज की
  • देओरिया में खुराब स्कूल का वीडियो वायरल होने पर कार्यकर्ता को गिरफ्तार किया गया

पृष्ठभूमि

उत्तरी प्रदेश में छात्र-विद्यार्थी आंदोलनों ने हाल ही में कई जिलों में धूम मचा दी है। 20 अगस्त को गूगरापुर के एक कंपोजिट स्कूल में छात्रों और उनके अभिभावकों ने प्रधानाध्यापक राकेशेंद्र सैक्सेना के खिलाफ विरोध किया। इस दौरान कई छात्र बिस्किट और अन्य छोटे-छोटे इनाम देकर भाग लेने के लिए प्रेरित किए जाने का दावा कर रहे थे।

पुलिस ने इस घटना को लेकर गुरुसुहैगंज पुलिस स्टेशन में एक FIR दर्ज की, जिसमें बिस्किट वितरण को "भ्रमित करने" वाला एक कारक बताया गया। केस फाइल करने वाले विष्णु पाथक ने कहा कि कुछ राजनीतिक दल इस घटना का उपयोग शिक्षा विभाग की छवि को धूमिल करने के लिए कर रहे हैं।

मुख्य अधिकारी का निर्देश

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को एक दिशा-निर्देश जारी किया, जिसमें स्कूलों और कॉलेजों के बारे में "भ्रामक" वीडियो और जानकारी को रोकने के लिए FIR दर्ज करने का आदेश दिया गया। उन्होंने कहा कि कुछ लोग सोशल मीडिया पर पुरानी या गिरावट वाली स्कूल इमारतों की तस्वीरें पोस्ट करके सरकार की छवि को बिगाड़ रहे हैं।

देओरिया में दूसरा मामला

देओरिया में स्थानीय कार्यकर्ता रजत सिंह को एक प्राथमिक स्कूल में बिना अनुमति प्रवेश करके "खुराब" स्थित कैंपस की तस्वीरें पोस्ट करने के बाद FIR में शामिल किया गया। शिक्षा विभाग ने बताया कि वह इमारत पहले से ही नीलामी में बेची जा चुकी थी और अब उसे हटाया जा रहा था।

सिंह पर सार्वजनिक मतभेद उत्पन्न करने, सार्वजनिक उत्पीड़न और अनधिकृत प्रवेश के आरोप लगाए गए हैं। इस मामले की शिकायत विनय शील मिश्रा, ब्लॉक एजुकेशन अधिकारी, ने की थी।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that the politicization of student protests in Uttar Pradesh could set a precedent for how dissent is managed in educational institutions across India, potentially affecting policy making and civil liberties.

"शिक्षा संस्थानों में बाहरी हस्तक्षेप को रोकना आवश्यक है, परंतु इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ संतुलित करना चाहिए," कहते हैं सामाजिक विज्ञान के प्रोफेसर डॉ. अजय मेहता।
Did You Know?: उत्तर प्रदेश में 2023 में ही 150 से अधिक स्कूलों में छात्र-विद्यार्थी विरोध हुए थे, जो पिछले पाँच वर्षों में सबसे अधिक संख्या है।

Frequently Asked Questions

Q: क्या बिस्किट वितरण वास्तव में छात्रों को लुभाने का साधन था?
A: पुलिस की जांच में यह बताया गया है कि बिस्किट केवल एक बहाना था और वास्तविक उद्देश्य विरोध को भड़काना था।

Q: इस FIR से भविष्य में स्कूलों में बाहरी लोगों की पहुँच पर क्या प्रतिबंध आएगा?
A: राज्य ने पहले ही निर्देश जारी कर दिया है कि सभी बाहरी व्यक्तियों को स्कूल में प्रवेश से पहले अनुमति लेनी होगी, जिससे ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।