मदुरै में दृष्टिहीन पुनर्वास कल्याण संघ ने राज्य आयुक्त और दिव्यांग कल्याण सचिव के खिलाफ सरकारी हस्तक्षेप का विरोध किया, जिसमें 67 लाख रुपये के वेतन हेराफेरी के आरोप लगाए गए हैं।
- दृष्टिहीन पुनर्वास कल्याण संघ ने मदुरै कलेक्टररेट में सिट‑इन किया
- ६७ लाख रुपये के वेतन को लेकर NGO धोखाधड़ी का आरोप
- आयोग और आयुक्त के खिलाफ तत्काल पदस्थापना की मांग
प्रदर्शन की पृष्ठभूमि
दृष्टिहीन पुनर्वास कल्याण संघ (Visually Impaired Rehabilitation Welfare Association) के सदस्य सोमवार को मदुरै कलेक्टररेट परिसर में सिट‑इन प्रदर्शन करने लगे। संघ के अध्यक्ष कुमार ने बताया कि राज्य आयुक्त और दिव्यांग कल्याण सचिव को तत्काल पदस्थापना से हटाया जाना चाहिए, क्योंकि उन्होंने गैर‑सरकारी संगठनों (NGO) को छुपाया है जो वित्तीय दुराचार में लिप्त हैं।
मुख्य आरोप
प्रदर्शकों ने तंजावेल, दिव्यांग कल्याण अधिकारी, के द्वारा उजागर किए गए 67 लाख रुपये की वेतन हेराफेरी का उल्लेख किया, जो तमिलनाडु राइट्स प्रोजेक्ट के फील्ड वर्करों से संबंधित है। तंजावेल ने साक्ष्य जमा किए, परंतु सरकार ने उन्हें अलग कार्यालय में स्थानांतरित कर दिया, जिससे उनका संरक्षण नहीं हुआ।
दावों की सूची
संघ ने चार प्रमुख मांगें रखी हैं: (1) आयुक्त और सचिव का तत्काल अनुशासनात्मक स्थानांतरण, (2) तंजावेल की स्थानांतरण रद्द, (3) काली सूची में मौजूद NGO के अनुबंध समाप्त करना, और (4) उसके सहायक इकाई के अनुबंध भी बंद करना, जो सात जिलों में कार्यरत है।
इतिहासिक पृष्ठभूमि
पिछले दो वर्षों में तमिलनाडु में कई बार दिव्यांग कल्याण संबंधी भ्रष्टाचार के मामले सामने आए हैं। 2024 में एक समान NGO को वित्तीय अनियमितताओं के लिए ब्लैकलिस्ट किया गया था, लेकिन फिर भी वही संगठन विभिन्न जिलों में कार्य कर रहा था, जिससे समुदाय में निराशा बढ़ी।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that such protests highlight systemic gaps in oversight of NGOs receiving public funds, and they can trigger policy reforms that safeguard vulnerable groups across India.
"जब तक सरकार पारदर्शिता नहीं अपनाती, ऐसी घोटालों की पुनरावृत्ति संभव है," कहा गया है सामाजिक न्याय विशेषज्ञ डॉ. अजय सिंह ने।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: इस आंदोलन का मुख्य लक्ष्य क्या है?
उत्तर: आयुक्त, सचिव की पदस्थापना को रद्द कराना और भ्रष्ट NGOs के अनुबंध समाप्त करना।
प्रश्न 2: क्या सरकार ने कोई औपचारिक प्रतिक्रिया दी है?
उत्तर: अभी तक कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं मिली है; राजस्व विभाग के अधिकारी और जिला कल्याण अधिकारी ने वार्ता की पेशकश की है।