बेल्जियम के रक्षा मंत्री थियो फ्रैंकेन ने भारत को आश्वासन दिया कि वे पाकिस्तान को कोई रक्षा तकनीक या सहयोग नहीं देंगे। इस दौरान भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने संभावित तकनीकी हस्तांतरण के जोखिमों पर गंभीर चिंता व्यक्त की।
- बेल्जियम ने पाकिस्तान को रक्षा सहयोग न देने की स्पष्ट घोषणा की।
- राजनाथ सिंह ने तकनीकी हस्तांतरण के संभावित जोखिमों को उजागर किया।
- भारत‑बेल्जियम रक्षा सहयोग के दायरे में समुद्री सुरक्षा और एयरोस्पेस पर नया विस्तार होगा।
नई दिल्ली, 3 सितंबर 2026 – बेल्जियम ने भारत को आश्वासन दिया कि वह पाकिस्तान को कोई रक्षा सहयोग या तकनीकी सहायता नहीं प्रदान करेगा, यह घोषणा दो देशों के रक्षा मंत्रियों के बीच नई दिल्ली में हुई बातचीत के बाद सामने आई। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस बैठक में पाकिस्तान को संभावित बेल्जियन रक्षा तकनीक प्रदान करने की संभावना को लेकर भारत की गहरी चिंता व्यक्त की। बेल्जियम के रक्षा मंत्री थियो फ्रैंकेन ने इस बात पर जोर दिया कि बेल्जियम का भारत के साथ रणनीतिक साझेदारी में कोई सवाल नहीं है और पाकिस्तान के साथ कोई रक्षा सहयोग नहीं होगा।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
पिछले कुछ वर्षों में भारत ने अपने रक्षा उपकरणों के आयात को कम करके आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। "आत्मनिर्भर भारत" और "मेकर इन इंडिया" जैसी पहलों के तहत भारत ने विदेशी रक्षा कंपनियों के साथ सहयोग को अधिक पारदर्शी और सीमित करने की नीति अपनाई है, जिससे पाकिस्तान जैसी प्रतिद्वंद्वी को तकनीकी लाभ न मिल सके। इस संदर्भ में बेल्जियम के इस आश्वासन का महत्व और भी बढ़ जाता है।
बैठक में दोनों देशों ने द्विपक्षीय रक्षा और औद्योगिक सहयोग के सभी पहलुओं की समीक्षा की। दोनों पक्षों ने रक्षा सहयोग संवाद, उच्च‑स्तरीय यात्राओं, प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण के माध्यम से सहयोग को विस्तारित करने पर सहमति व्यक्त की। उन्होंने इंडो‑प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा, सूचना सुरक्षा और एयरोस्पेस में सहयोग को भी बढ़ाने का इरादा जताया।
बेल्जियम के प्रधानमंत्री बर्ट डी वेवर की भारत यात्रा के दौरान यह द्विपक्षीय बैठक हुई, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बर्ट डी वेवर के बीच हुए संवाद के साथ हुई। यह संकेत देता है कि यूरोप के कई देशों के साथ भारत की रणनीतिक साझेदारी मजबूत हो रही है।
बेल्जियम के रक्षा उद्योग के प्रतिनिधियों ने भी भारत‑बेल्जियम रक्षा CEOs राउंडटेबल और B2B मीटिंग्स में भाग लिया। इस मंच पर उन्होंने भारतीय रक्षा निर्माण क्षमताओं को बढ़ाने के लिए संयुक्त विकास और सह‑उत्पादन के अवसरों पर चर्चा की।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that Belgium’s clear stance not only strengthens India’s strategic autonomy but also sends a decisive signal to other European nations about the importance of responsible technology transfer in a volatile South Asian security environment.
"Defence technology sharing must be governed by strict end‑use checks to prevent escalation in the sub‑continent," says Dr. Ananya Gupta, senior security analyst.
Frequently Asked Questions
Q1: क्या बेल्जियम ने पहले पाकिस्तान को कोई रक्षा तकनीक प्रदान की है?
A: अब तक सार्वजनिक रूप से बेल्जियम ने पाकिस्तान को कोई प्रमुख रक्षा तकनीक नहीं दी है, और इस बार उन्होंने स्पष्ट रूप से सहयोग नहीं करने की घोषणा की है।
Q2: इस आश्वासन का भारत‑बेल्जियम व्यापार पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
A: दोनों देशों के बीच रक्षा‑उद्योग सहयोग में वृद्धि की संभावना है, जिससे भारतीय कंपनियों को यूरोपीय बाजारों में बेहतर पहुँच मिल सकती है।