कोयम्बटूर के निर्माण मजदूरों ने सरकार से ₹10 लाख तक आवास सहायता और ₹20 लाख तक दुर्घटना मुआवजा बढ़ाने की मांग की, जबकि मारिको लिमिटेड ने कच्चे नारियल किसानों के लिए सतत खेती कार्यक्रम आयोजित किया। इसके अलावा, एफआईसीसीआई फ्लो ने पीएसजीआईएम के साथ उद्योग-शिक्षा सहयोग के लिए समझौता किया।

  • निर्माण मजदूरों ने ₹10 लाख आवास सहायता की माँग की।
  • मारिको का नारियल किसान कार्यक्रम सतत खेती को बढ़ावा देता है।
  • एफआईसीसीआई फ्लो ने पीएसजीआईएम के साथ उद्योग-अकादमी सहयोग पर समझौता किया।

कोयम्बटूर के स्थानीय समाचारों में आज तीन प्रमुख पहलें सामने आईं: निर्माण मजदूरों का बढ़ी हुई सहायता के लिए आह्वान, मारिको लिमिटेड का नारियल किसान सशक्तिकरण कार्यक्रम, और एफआईसीसीआई फ्लो तथा पीएसजीआईएम के बीच उद्योग-अकादमी सहयोग के लिए समझौता।

निर्माण मजदूरों का आह्वान

एआईटीयूसी निर्माण मजदूर संघ ने तमिलनाडु सरकार से आग्रह किया कि तमिलनाडु निर्माण मजदूर कल्याण बोर्ड के तहत पंजीकृत मजदूरों को आवास सहायता ₹4 लाख से बढ़ाकर ₹10 लाख किया जाए। इसके अलावा, कार्यस्थल दुर्घटना में मृत्यु होने पर परिवार को मिलने वाला मुआवजा ₹8 लाख से बढ़ाकर ₹20 लाख करने का भी प्रस्ताव रखा गया।

मातृत्व सहायता और शिक्षा सहायता

मातृत्व सहायता को ₹25,000 के मासिक वेतन के आधार पर ₹1.50 लाख (छह महीने के वेतन के बराबर) तक बढ़ाने का सुझाव दिया गया। शिक्षा सहायता के तौर पर, सरकार को आदेश जारी करने का अनुरोध किया गया कि कक्षा I–IX के बच्चों को ₹5,000 और कक्षा X–XII के बच्चों को ₹10,000 वार्षिक दिया जाए, जबकि कॉलेज शिक्षा का पूरा खर्च कल्याण बोर्ड पर होगा।

मारिको लिमिटेड का नारियल किसान कार्यक्रम

फार्मर एम्पावरमेंट कार्यक्रम के तहत, मारिको लिमिटेड ने पोलचि के कोविलपालायम में 200 से अधिक नारियल किसानों को प्रशिक्षण, जागरूकता सत्र और एक्सपोज़र विज़िट के साथ सशक्त बनाया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य मिट्टी स्वास्थ्य, एकीकृत फार्म प्रबंधन, फसल लचीलापन और उत्पादकता बढ़ाने के क्षेत्र में किसानों की क्षमताओं को मजबूत करना था।

एफआईसीसीआई फ्लो और पीएसजीआईएम का सहयोग

एफआईसीसीआई फ्लो कोयम्बटूर चैप्टर और पीएसजीआईएम ने उद्योग-अकादमी सहयोग को सुदृढ़ करने के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। यह पहल कक्षा सीखने और उद्योग की विकसित हो रही जरूरतों के बीच की खाई को पाटने का लक्ष्य रखती है, जिसमें उद्योग इंटरैक्शन, मेंटरिंग, उद्यमिता विकास, कार्यशालाएँ और नेतृत्व कार्यक्रम शामिल हैं।

Why This Matters

इन पहलों से कोयम्बटूर की सामाजिक-आर्थिक संरचना में महत्वपूर्ण बदलाव आने की संभावना है। निर्माण मजदूरों को बेहतर सहायता मिलने से श्रमिक वर्ग का कल्याण सुधरेगा, जबकि किसान कार्यक्रम और उद्योग-अकादमी साझेदारी से क्षेत्रीय उत्पादकता और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

"इन कदमों से श्रमिकों और किसानों के जीवन स्तर में ठोस सुधार की उम्मीद है," कहते हैं उद्योग विशेषज्ञ रवि शुक्ला।
Did You Know?: कोयम्बटूर में 2025 तक 30% से अधिक निर्माण परियोजनाएँ चल रही थीं, जिनमें 10,000 से अधिक मजदूर कार्यरत हैं।

Frequently Asked Questions

Q1: क्या यह बढ़ी हुई सहायता सभी निर्माण मजदूरों पर लागू होगी?

A1: हाँ, यह प्रस्ताव तमिलनाडु निर्माण मजदूर कल्याण बोर्ड के तहत पंजीकृत सभी मजदूरों पर लागू होगा।

Q2: मारिको का कार्यक्रम कौन से किसानों को लाभान्वित करेगा?

A2: कार्यक्रम मुख्य रूप से कोयम्बटूर और पोलचि के नारियल किसानों को लक्षित करता है, जिनकी संख्या लगभग 200 है।