एनआईटी-करन. के अनुसार, नया पाठ्यक्रम सिद्धांत और व्यवहार को बराबर करता है, जिससे छात्रों का दो-तिहाई समय कक्षा के बाहर व्यावहारिक गतिविधियों में व्यतीत होगा। यह बदलाव उद्योग, अनुसंधान और उद्यमिता के लिए समग्र कौशल विकसित करने पर केंद्रित है।
- कुल क्रेडिट घटाकर सिद्धांत और व्यवहार का संतुलन
- दो-तिहाई समय बाहर: लैब, इंटर्नशिप और उद्यमिता
- चार प्रकार की लाइफ‑स्किल्स पर साप्ताहिक 2 घंटे की अनिवार्य सहभागिता
राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान – करन. (एनआईटी‑के) ने शुक्रवार को बताया कि 2026 के बैच के लिए एक नया, "बोल्ड और संतुलित" इंजीनियरिंग पाठ्यक्रम लागू किया गया है। यह परिवर्तन छात्रों को सैद्धांतिक ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक, सॉफ्ट और उद्यमशील कौशल से लैस करने का उद्देश्य रखता है।
नए पाठ्यक्रम में कुल क्रेडिट की संख्या घटाई गई है, जबकि प्रमुख विषय में अतिरिक्त ऑनेर डिग्री या किसी अन्य विभाग में माइनर डिग्री का विकल्प खुला है। सैद्धांतिक पाठ्यक्रमों से प्राप्त क्रेडिट अब व्यावहारिक गतिविधियों के बराबर होंगे, जिससे छात्रों का समय लगभग दो‑तिहाई बाहर व्यतीत होगा।
इसमें लैब कार्य, जीवन‑कौशल गतिविधियाँ, उद्योग इंटर्नशिप, अनुसंधान और विकास परियोजनाएँ तथा व्यवसाय स्टार्ट‑अप योजना शामिल हैं। साप्ताहिक प्रैक्टिस क्रेडिट के लिए घंटे दोगुने हैं, इसलिए यह बदलाव छात्रों के लिए अधिक समग्र अनुभव लाता है।
प्रोफेसर एवं अकादमिक कार्यक्रमों के डीन, अननप्पा ने कहा: “यह पाठ्यक्रम तीन साल के गहन परामर्श, उद्योग और पूर्व छात्र के साथ बैठकों के बाद तैयार किया गया है। हम चाहते हैं कि हमारे इंजीनियरों में ज्ञान के साथ-साथ जिज्ञासा, रचनात्मकता और नैतिकता भी हो।”
स्टूडेंट वेलफेयर के डीन, गोविंद राज मण्डेला ने जीवन‑कौशल पर जोर दिया, “चार प्रकार की गतिविधियाँ – शारीरिक, सांस्कृतिक, तकनीकी और पेशेवर – प्रत्येक पर छात्र को कम से कम दो घंटे प्रति सप्ताह व्यतीत करना है, जिसमें विशेषज्ञ कोच मार्गदर्शन करेंगे।”
सपोर्टिंग फैकल्टी और कोचों के साथ, 1,100 से अधिक छात्रों को एक साथ विभिन्न गतिविधियों में भाग लेने की व्यवस्था की गई है।
डायरेक्टर ब. रवि ने भविष्य के लिए दृष्टिकोण साझा किया: “एआई युग में तकनीकी ज्ञान से परे मानवीय मूल्यों की आवश्यकता है। हम इस पाठ्यक्रम से ऐसे व्यक्तियों को तैयार करना चाहते हैं जो 2047 तक भारत को समृद्ध बनाएँ।”
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि भारत की इंजीनियरिंग शिक्षा में व्यावहारिक कौशल की कमी को दूर करने के लिए यह कदम अत्यंत आवश्यक है। यह बदलाव वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भारतीय स्नातकों को एक नया किनारा देगा।
“व्यावहारिक अनुभव को सैद्धांतिक शिक्षा के बराबर रखना भविष्य के इंजीनियरों को अधिक नौकरी‑उपयुक्त बनाता है।” – प्रो. अननप्पा
Frequently Asked Questions
Q1: क्या नया पाठ्यक्रम सभी इंजीनियरिंग शाखाओं पर लागू होता है?
A1: हाँ, यह सभी बीटेक शाखाओं के लिए समान रूप से लागू है।
Q2: क्या लाइफ‑स्किल गतिविधियाँ अनिवार्य हैं?
A2: हाँ, प्रत्येक छात्र को चारों प्रकार की गतिविधियों में साप्ताहिक दो घंटे व्यतीत करना आवश्यक है।