पूर्व आरबीआई गवर्नर रघुर्म राजन ने भारत की चिप उद्योग को बढ़ावा देने की योजना पर सवाल उठाया, यह कहते हुए कि चिप्स को तस्करी करना आसान है। इस बयान ने देश में निवेश और तकनीकी स्वावलंबन पर बहस छेड़ दी।

  • रघुर्म राजन का तर्क कि चिप्स को तस्करी करना आसान है।
  • भारत की करोड़ों निवेश पर सवाल उठाया गया।
  • आधारभूत सुधारों पर ध्यान केंद्रित करने की माँग।

भारत की चिप उद्योग को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा की गई भारी निवेश पर रघुर्म राजन ने सवाल उठाया, यह कहते हुए कि चिप्स को तस्करी करना आसान है। यह बयान, जिसे उन्होंने फोरलाइन के साथ साक्षात्कार में दिया, ने देश में निवेशकों और नीति निर्माताओं के बीच बहस को बढ़ा दिया।

भारत ने 2021 में सेमीकॉन इंडिया प्रोग्राम के तहत 76,000 कोर परियोजनाओं की शुरुआत की, जिसके अंतर्गत टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स, माइक्रॉन और अन्य कंपनियों द्वारा 1.64 लाख करोड़ रुपये के निवेश का वादा किया गया। इन परियोजनाओं का उद्देश्य भारत को वैश्विक चिप सप्लाई चेन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए तैयार करना था।

रघुर्म राजन का तर्क है कि चिप्स का छोटा आकार और हल्की प्रकृति उन्हें अंतरराष्ट्रीय सीमा पर तस्करी के लिए आदर्श बनाती है। उन्होंने चीन और रूस के उदाहरणों का हवाला देते हुए बताया कि इन देशों ने भी चिप्स को अवैध रूप से अपने देशों में लाया है।

Why This Matters

इस टिप्पणी से यह स्पष्ट होता है कि भारत को अपनी चिप उद्योग को बढ़ावा देने के साथ-साथ वैश्विक व्यापार नियमों और तस्करी के खिलाफ सख्त उपायों पर भी ध्यान देना होगा। यह सरकार की नीति की दिशा और निवेशकों के विश्वास को प्रभावित कर सकता है।

"भारत को केवल चिप्स बनाने पर नहीं, बल्कि एक स्थिर व्यापार वातावरण और प्रौद्योगिकी पारिस्थितिकी तंत्र पर भी ध्यान केंद्रित करना चाहिए," कहते हैं प्रोफेसर शशांक मेहता, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान के चिप नीति विशेषज्ञ।
Did You Know?: भारत में 2021 में सेमीकंडक्टर की कमी के कारण ऑटोमोबाइल उत्पादन में 60% की गिरावट आई थी।

Frequently Asked Questions

1. भारत की चिप उद्योग में निवेश के मुख्य उद्देश्य क्या हैं?
2. रघुर्म राजन का तर्क तस्करी के संदर्भ में क्यों महत्वपूर्ण है?