सिक्किम ने 40 उच्च-जोखिम ग्लेशियल झीलों की पहचान की है, जिनमें से 16 को सबसे अधिक जोखिम वाला वर्ग A घोषित किया गया है। नेपाल में अगस्त की बाढ़ के बाद, राज्य ने ग्लेशियल झील विस्फोट (GLOF) जोखिम को कम करने के लिए एक व्यापक योजना तैयार की है। शाको छो झील को सबसे नाजुक माना गया है और इसके लिए विशेष उपायों पर काम चल रहा है।
- 40 उच्च-जोखिम ग्लेशियल झीलें पहचानी गईं।
- 16 झीलें वर्ग A, सबसे अधिक जोखिम वाली।
- नेपाल की बाढ़ के बाद सिक्किम ने जोखिम कम करने की योजना बनाई।
पृष्ठभूमि और वर्तमान स्थिति
सिक्किम सरकार ने हाल ही में 40 उच्च-जोखिम ग्लेशियल झीलों की पहचान की है, जिनमें 16 को वर्ग A (सबसे अधिक जोखिम) के रूप में नामित किया गया है। यह कदम अगस्त 2026 में नेपाल के नुवाकोट जिले में हुई बाढ़ के बाद आया, जिसमें 1200 से अधिक लोगों की जान गई। यद्यपि नेपाल में बाढ़ ग्लेशियल झील विस्फोट (GLOF) के कारण नहीं थी, परंतु इस घटना ने हिमालय की जलवायु-प्रेरित खतरों के प्रति संवेदनशीलता को फिर से उजागर किया।
सिक्किम की रणनीतिक प्रतिक्रिया
सिक्किम के प्रमुख सचिव संदीप ताम्बे ने बताया कि राज्य ने उपग्रह चित्रों और रिमोट सेंसिंग का उपयोग करके झीलों के आकार और स्तर की निगरानी शुरू की है। शाको छो झील को सबसे अधिक जोखिम वाली के रूप में चिन्हित किया गया है, और इसके लिए एक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) और जल शक्ति मंत्रालय को भेजी गई है।
संबंधित परियोजनाएँ और अवसंरचना
ल्होनाक कॉम्प्लेक्स के लिए केंद्रीय जल आयोग और सिक्किम सरकार डोल्मा साम्पा के पास एक बाढ़-रिटेंशन संरचना के लिए DPR तैयार कर रही हैं। गुरुदोंगमार कॉम्प्लेक्स में झील के निकास पर एक मोराइन प्लग वॉल प्रस्तावित की गई है, जिससे सांस्कृतिक और धार्मिक पहलुओं को ध्यान में रखा गया है।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows कि हिमालय की जलवायु परिवर्तन के कारण ग्लेशियल झीलों का जोखिम बढ़ रहा है, और यह जोखिम न केवल स्थानीय समुदायों के लिए बल्कि पूरे क्षेत्र के जल संसाधनों के लिए भी एक गंभीर चुनौती प्रस्तुत करता है।
"क्लाइमेट बदलाव के कारण हिमालय में ग्लेशियल झीलों का जोखिम बढ़ रहा है, जिससे बाढ़ का खतरा और भी गंभीर हो रहा है।"
Frequently Asked Questions
1. क्या शाको छो झील में अभी भी बाढ़ का जोखिम है?
2. सिक्किम की ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन नीति का ग्लेशियल झीलों पर क्या प्रभाव पड़ेगा?