दिल्ली हाई कोर्ट ने वक़्फ अधिनियम के तहत दिल्ली वक़्फ बोर्ड के गठन की प्रक्रिया को तेज करने के लिए केंद्र और दिल्ली सरकार से विस्तृत उत्तर माँगा है। न्यायाधीश अनिश दयाल ने 8 सितंबर को दोनों पक्षों को चार हफ्ते का समय दिया।
- न्यायाधीश अनिश दयाल ने दिल्ली वक़्फ बोर्ड गठन पर केंद्र और राज्य सरकारों को चार हफ़्ते की समय सीमा दी।
- पिछले बोर्ड का कार्यकाल अगस्त 2023 में समाप्त हुआ, फिर भी नया बोर्ड अभी तक नहीं बना।
- वक़्फ संपत्तियों की अनधिकृत कब्ज़ा और क्षति का जोखिम बढ़ा है।
दिल्ली हाई कोर्ट ने वक़्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 के प्रावधानों के अनुसार दिल्ली वक़्फ बोर्ड के गठन की दिशा में केंद्र तथा दिल्ली सरकार की स्थिति जानने के लिए नोटिस जारी किया है। यह कदम तब आया जब वादी मोहम्मद शाहिद ने अदालत में यह तर्क दिया कि बोर्ड की अनुपस्थिति ने राजधानी के कई वक़्फ संपत्तियों को अनधिकृत कब्ज़ा और क्षति के जोखिम में डाल दिया है।
पृष्ठभूमि और मौजूदा स्थिति
वक़्फ बोर्ड का अंतिम कार्यकाल अगस्त 2023 में समाप्त हुआ, लेकिन उसके बाद कोई नया बोर्ड गठित नहीं किया गया। जनवरी 2024 में दिल्ली सरकार ने एक प्रशासक नियुक्त किया, परन्तु बोर्ड की वैधानिक स्थापना अभी तक नहीं हुई। वादी के वकीलों ने तर्क दिया कि यह देरी संसद द्वारा निर्धारित वैधानिक दायित्व का उल्लंघन है।
न्यायालय का आदेश
8 सितंबर को न्यायाधीश अनिश दयाल ने केंद्र और दिल्ली सरकार दोनों को चार हफ़्ते के भीतर अपने-अपने उत्तर दाखिल करने का निर्देश दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि सरकारें समय पर कार्रवाई नहीं करतीं तो यह विधायी प्रक्रिया की अनदेखी और राज्य के शासन के सिद्धांतों का उल्लंघन माना जाएगा।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that prolonged vacancy of the Delhi Waqf Board not only threatens heritage properties but also undermines the confidence of the Muslim community in institutional safeguards, potentially escalating communal tensions in the capital.
"वक़्फ बोर्ड का गठन न होने से सार्वजनिक धार्मिक और शैक्षिक संस्थानों की सुरक्षा खतरे में पड़ती है, और यह प्रशासनिक लापरवाही का स्पष्ट संकेत है," कहा शैक्षणिक विशेषज्ञ डॉ. फ़रीदा खान ने।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
वक़्फ अधिनियम, 1995, भारत में वक़्फ संपत्तियों के प्रबंधन और संरक्षण के लिए एक व्यापक ढाँचा प्रदान करता है। 2025 में हुए संशोधन ने प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेश में एक वक़्फ बोर्ड के गठन को अनिवार्य किया, जिससे स्थानीय समुदायों को उनके धार्मिक और सामाजिक संस्थानों की देखरेख में भागीदारी मिल सके।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: यदि सरकारें समय सीमा में उत्तर नहीं देतीं तो क्या होगा?
उत्तर: अदालत संभावित रूप से दंडात्मक आदेश जारी कर सकती है या सीधे बोर्ड के गठन के लिए निर्देश दे सकती है।
प्रश्न 2: वर्तमान में कौन सी प्रमुख वक़्फ संपत्तियां जोखिम में हैं?
उत्तर: दिल्ली में कई historic मस्जिदें, शैक्षणिक संस्थान और शहीदों के कब्रिस्तान वक़्फ अधिनियम के तहत संरक्षित हैं, परन्तु उनके प्रबंधन में लापरवाही की रिपोर्टें सामने आई हैं।