कांग्रेस के नेता नाना पाटले ने कहा कि चीन द्वारा कब्जा किए गए लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश के मुद्दे को ब्रिक्स घोषणा में नहीं दिखाने पर प्रधानमंत्री को स्पष्ट रूप से चीन को वापसी के लिए कहना चाहिए। यह मांग भारत के लिए इस शिखर सम्मेलन से सबसे बड़ा लाभ होगी।

  • कांग्रेस ने प्रधानमंत्री को चीन के कब्जे वाले क्षेत्रों पर स्पष्ट मांग करने का आग्रह किया।
  • ब्रिक्स घोषणा में लद्दाख‑अरुणाचल का उल्लेख न होना राजनीतिक आलोचना का कारण बना।
  • इस मुद्दे का समाधान भारत‑चीन संबंधों में नई दिशा दे सकता है।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता नाना पाटले ने हालिया ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के बाद एक साक्षात्कार में कहा कि "चीन ने अरुणाचल और लद्दाख जैसे क्षेत्रों को कब्जा कर रखा है, इसलिए प्रधानमंत्री को सीधा और कठोर स्वर में चीन से वापसी की माँग करनी चाहिए"। पाटले का यह बयान भारतीय विदेश नीति की दिशा को लेकर पार्टी के भीतर गहरी असंतोष को दर्शाता है।

ब्रिक्स समूह के इस वर्ष के शिखर सम्मेलन में भारत, चीन, रूस, ब्राज़ील और दक्षिण अफ्रीका के नेताओं ने आर्थिक सहयोग को प्राथमिकता दी, जबकि सीमा विवाद जैसे संवेदनशील मुद्दों को बाहर रखा गया। इस कारण कांग्रेस ने घोषणा में लद्दाख‑अरुणाचल का उल्लेख न होने को "इतिहास को नज़रअंदाज़ करने" का आरोप लगाया।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश दोनों ही भारत-चीन सीमा पर स्थित रणनीतिक क्षेत्रों में से हैं। 1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद से दोनों क्षेत्रों पर चीन का दावा बना हुआ है, जबकि भारत ने इन्हें अपने अभिन्न भाग के रूप में मान्यता दी है। पिछले दशकों में इस विवाद ने कई बार सैन्य टकराव और कूटनीतिक तनाव को जन्म दिया है।

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान, भारत के प्रधानमंत्री ने आर्थिक सहयोग के अलावा चीन के साथ सीमा मुद्दों पर कोई स्पष्ट बयान नहीं दिया। यह चुप्पी कांग्रेस के भीतर आलोचना का मुख्य कारण बनी, क्योंकि पार्टी का मानना है कि आर्थिक लाभ के साथ साथ राष्ट्रीय सुरक्षा को भी प्राथमिकता देनी चाहिए।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि ब्रिक्स जैसे बहुपक्षीय मंच पर भारत की रणनीति बदल रही है; आर्थिक साझेदारी को बढ़ावा देते हुए भी, राष्ट्रीय संप्रभुता के मुद्दों को अनदेखा करना राजनीतिक जोखिम को बढ़ा सकता है। यदि प्रधानमंत्री चीन से स्पष्ट रूप से वापसी की मांग नहीं करते, तो यह घरेलू राजनीति में विपक्षी दलों को और अधिक समर्थन दिला सकता है।

"भौगोलिक विवादों को आर्थिक मंच पर टालना, भारत के दीर्घकालिक सुरक्षा हितों को खतरे में डाल सकता है," कहा अंतरराष्ट्रीय संबंध विशेषज्ञ डॉ. अजय सिंह ने।
Did You Know?: लद्दाख 2019 में भारत‑चीन सीमा पर हुए दो बड़े टकरावों में से एक का प्रमुख स्थल रहा है, जिसमें दोनों देशों की सेना ने गंभीर क्षति झेली।

Frequently Asked Questions

Q1: क्या ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भारत की विदेश नीति में बदलाव की संभावना है?

A: विशेषज्ञों का मानना है कि आर्थिक सहयोग को बढ़ाते हुए, भारत को सीमा विवादों को भी मंच पर लाना पड़ेगा, ताकि अंतरराष्ट्रीय समर्थन मिल सके।

Q2: कांग्रेस की इस मांग का प्रधानमंत्री पर क्या प्रभाव पड़ेगा?

A: यदि प्रधानमंत्री स्पष्ट बयान देते हैं, तो यह घरेलू राजनीति में कांग्रेस को लाभ पहुँचा सकता है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चीन के साथ तनाव बढ़ सकता है।