दक्षिणी जिलों के किसानों के संघ ने एल नीनो के प्रतिकूल प्रभाव को देखते हुए विरुधुनगर के सभी 8 छोटे बांधों की खुदाई की मांग की है। उन्होंने बताया कि बिना खुदाई के जलधारण क्षमता में 40% तक कमी आई है और बरसात के पानी का बहाव समुद्र में हो रहा है।
- सभी 8 छोटे बांधों की जलधारण क्षमता 40% तक घट गई है।
- सरकार को बरसात से पहले खुदाई कार्य तेज़ी से शुरू करना चाहिए।
- खुदाई से निकाली गई मिट्टी किसानों को मुफ्त में दी जा सकती है।
दक्षिणी जिलों के किसानों के संघ ने राज्य सरकार से एल नीनो के प्रतिकूल प्रभाव को देखते हुए विरुधुनगर जिले के सभी 8 छोटे बांधों की खुदाई (डेसिल्टिंग) करने की अपील की है। संघ के प्रवक्ता आर. राम पंडियन ने बताया कि कई वर्षों से इन बांधों की खुदाई नहीं हुई, जिससे उनकी जलधारण क्षमता में 40% तक कमी आई है।
बांधों की वर्तमान स्थिति
पिलवक्कल पेरियार और कोविलार बांध 1950 में बने थे, जबकि वेम्बाकोट्टाई बांध 1960 में। 2019‑20 में इन पर रखरखाव (कुडिमरमथु) कार्य हुआ, पर खुदाई नहीं की गई। परिणामस्वरूप टॉपसॉइल की मोटाई दो फुट से बढ़कर चार फुट हो गई। अन्य पाँच बांध – गोलवारपट्टी, अनैकुट्टम, कुल्लुरसंधै, इर्रुक्कंगुड़ी और सस्थाकोइल – कभी भी खुदाई नहीं हुए हैं।
Why This Matters
एल नीनो के कारण दक्षिण‑पश्चिमी मानसून में सामान्य वर्षा नहीं होने की संभावना है, इसलिए इन बांधों की जलधारण क्षमता को बहाल करना अत्यावश्यक है। खुदाई से बरसात के पानी को बचाया जा सकता है, जिससे किसानों की सिंचाई सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण मुद्दा है; सरकार को तुरंत कार्यवाही करके किसानों की जल सुरक्षा को सुनिश्चित करना चाहिए।
Frequently Asked Questions
- बांधों की खुदाई क्यों आवश्यक है?
- खुदाई से किसानों को कौन‑से लाभ मिलेंगे?