कर्नाटक सार्वजनिक सेवा आयोग के 400 वैटेरिनरी अधिकारियों की भर्ती पर चल रहे जांच के तहत, प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने आईएएस अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार के बंद फ्लैट में ताला तोड़ने वाले लॉकस्मिथ की मदद से छापेमारी की। यह कार्रवाई 21 स्थानों की व्यापक जाँच का हिस्सा है।
- ED ने ताला तोड़ने के लिए लॉकस्मिथ की सहायता ली।
- यह छापेमारी वैटेरिनरी भर्ती में कागज़ लीकेज के आरोपों से जुड़ी 21 जगहों की जाँच का हिस्सा है।
- जांच में केंद्रीय ED (PMLA) और कर्नाटक CID दोनों शामिल हैं।
घटना का विवरण
बेंगलुरु में स्थित आईएएस अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार के अपार्टमेंट पर 24 अगस्त को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने छापेमारी की। यह कार्रवाई कर्नाटक सार्वजनिक सेवा आयोग (KPSC) द्वारा वैटेरिनरी अधिकारियों की भर्ती में संभावित अनियमितताओं की जांच के तहत की गई। गंगवार उस समय कर्नाटक के उद्योग एवं वाणिज्य विभाग में MSME निदेशक के रूप में कार्यरत थे, जबकि भर्ती के समय वह KPSC के परीक्षा नियंत्रक थे।
लॉक्स्मिथ की भूमिका
ED के बेंगलुरु ज़ोन के अधिकारी, साथ में CRPF के कर्मियों के, जब फ्लैट के मुख्य द्वार पर पहुँचे तो सुरक्षा गार्ड ने प्रवेश से इनकार कर दिया। अधिकारी ने बताया, “फ़्लैट बाहर से बंद था, फोन नहीं जुड़ रहा था, इसलिए हमें लॉकस्मिथ को बुलाकर डुप्लीकेट चाबी से दरवाज़ा खोलना पड़ा।” इस प्रक्रिया के बाद खोज कार्य देर रात तक जारी रहा।
व्यापक जाँच का दायरा
यह छापेमारी कर्नाटक के 21 स्थानों पर चल रही एक बड़े ऑपरेशन का हिस्सा है, जिसमें बेंगलुरु, हसन, चित्रदुर्ग, दवणगेरे, रायचूर, करवार, कलाबुर्गी और बेलगावी के साथ अहमदाबाद में भी तलाशी ली गई। सभी स्थानों पर दस्तावेज़, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और वित्तीय लेन‑देनों की जांच की गई।
कर्नाटक CID की समानांतर जांच
राज्य के आपराधिक जांच विभाग (CID) ने भी वैटेरिनरी भर्ती घोटाले की जांच शुरू कर रखी है। यह मामला 25 जुलाई को एक असंतुष्ट उम्मीदवार, डॉ. मंजुनाथ, द्वारा दायर शिकायत से उत्पन्न हुआ, जिसमें कहा गया था कि परीक्षा में कम से कम 29 उम्मीदवारों को प्रश्नपत्रों तक अनधिकृत पहुँच मिली थी। साथ ही KPSC के चेयरमैन, बोर्ड सदस्यों और कर्मचारियों के रिश्तेदारों को अंतिम चयन सूची में शीर्ष स्थान मिला था।
कानूनी पहलू
छापेमारी को रोकथाम धन शोधन अधिनियम (PMLA) की धारा 17 के तहत किया गया, जो धन शोधन से जुड़े मामलों में संपत्ति की जप्ती और तलाशी की अनुमति देता है। इस कार्रवाई के बाद, ED ने कहा कि “हमें प्रक्रिया के अनुसार दरवाज़ा खोलना पड़ा और घर की तलाशी ली गई।”
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
कर्नाटक में सरकारी भर्ती में कागज़ लीकेज और रिश्वत के आरोपों की लहर कई वर्षों से चल रही है। 2019 में समान प्रकार के मामलों में कई उच्चाधिकारियों को बर्खास्त किया गया था, और तब से राज्य ने भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए विभिन्न सुधार लागू किए हैं। फिर भी, वैटेरिनरी भर्ती में इस बार उजागर हुए आरोपों से यह सवाल उठता है कि क्या मौजूदा सुधार पर्याप्त हैं।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that the involvement of a senior IAS officer in a recruitment scandal could erode public trust in both state and central institutions, potentially prompting stricter oversight mechanisms and legislative reforms.
“ऐसे मामलों में उच्च स्तर के अधिकारियों का शामिल होना यह दर्शाता है कि भ्रष्टाचार के जाल कितने गहरे हो सकते हैं,” says legal analyst Priya Sharma.
Frequently Asked Questions
Q: क्या गंगवार को गिरफ्तार किया गया है?
A: अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है; जांच जारी है और आगे की कार्रवाई की संभावना है।
Q: इस मामले में CBI को शामिल करने की मांग किसने की?
A: कई पक्षों, जिसमें प्रभावित उम्मीदवार और कुछ राजनीतिक दल शामिल हैं, ने कर्नाटक हाई कोर्ट में CBI जांच की मांग की है।