भारत के प्रमुख वैज्ञानिकों और शिक्षाविदों के समूह ने सरकार से E20 पेट्रोल रोलआउट वापस लेने, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को समाप्त करने और काला जादू विरोधी कानून बनाने की मांग की। यह अपील विज्ञान आधारित नीति और शिक्षा पर बढ़ते निवेश की वकालत करती है।

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  • वैज्ञानिकों ने E20 पेट्रोल वापस लेने की मांग की।
  • नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को समाप्त करने का आग्रह।
  • काला जादू विरोधी कानून और शिक्षा पर 30% बजट बढ़ाने की मांग।

नई दिल्ली, 13 सितंबर 2026 – विज्ञान के क्षेत्र के प्रतिष्ठित नामों ने सरकार से E20 पेट्रोल के रोलआउट को तुरंत वापस लेने का आग्रह किया। इस अपील के साथ-साथ उन्होंने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को समाप्त करने और काला जादू विरोधी कानून लागू करने की माँग भी की।

मुंबई में आयोजित 'इंडिया मार्च फॉर साइंस' के दौरान हस्ताक्षरकर्ताओं ने छद्म विज्ञान को बढ़ावा देने वाली सरकारी नीतियों और शिक्षा व शोध में घटते निवेश पर चिंता जताई। प्रमुख हस्ताक्षरकर्ताओं में पद्म भूषण प्रो. एम. एस. रघुनाथन, SSB पुरस्कार विजेता प्रो. एस. जी. दानी, प्रो. अनिकेत सुले और पूर्व TIFR डॉ. एन. कृष्णन शामिल हैं।

इंडिया मार्च फॉर साइंस की शुरुआत 2017 में हुई थी, और इसका उद्देश्य सबूत-आधारित नीति-निर्माण और शोध के लिए अधिक फंडिंग की वकालत करना है। इस वर्ष के कार्यक्रम में E20 फ्यूल पॉलिसी पर तत्काल रोक लगाने की मांग के साथ-साथ जलवायु परिवर्तन और जैव विविधता पर भी प्रकाश डाला गया।

वैज्ञानिकों ने बताया कि E20 पेट्रोल के उपयोग से माइलेज घट सकता है और वाहनों की आयु कम हो सकती है। उन्होंने लाइफ‑साइकल एनवायरनमेंटल असेसमेंट की कमी और सहायक बुनियादी ढांचे के अभाव को भी प्रमुख मुद्दे बताया।

साथ ही, इस अपील में शिक्षा के लिए केंद्रीय बजट से कम से कम 10% और राज्य बजट से 30% हिस्सा आवंटित करने तथा शोध पर कुल खर्च को GDP के 0.7% से बढ़ाकर कम से कम 3% करने की माँग भी शामिल है।

आयोजकों ने "विज्ञान अपनाएं, भविष्य सुरक्षित करें" के नारे के तहत वैज्ञानिक पद्धति और तार्किक सोच को अपनाने का आग्रह किया, ताकि भारत के सामूहिक भविष्य को सुरक्षित किया जा सके।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows कि यदि सरकार वैज्ञानिक आधार पर नीति नहीं बनाती, तो भारत की ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरणीय स्थिरता पर गहरा असर पड़ेगा। E20 के रोलआउट से जुड़े अनिश्चितताएं आर्थिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर जोखिम बढ़ाती हैं।

"E20 की अस्थिरता से न केवल उपभोक्ताओं को नुकसान होता है, बल्कि यह ऊर्जा क्षेत्र में विश्वास को भी कमजोर करता है," कहते हैं प्रो. अनिकेत सुले, शोधकर्ता।
Did You Know?: भारत में 2024 तक E20 पेट्रोल का उपयोग 15% से अधिक वाहनों में किया जा रहा था, परंतु उसके वास्तविक प्रदर्शन पर सीमित डेटा उपलब्ध है।

Frequently Asked Questions

Q1: E20 पेट्रोल क्या है और यह सामान्य पेट्रोल से कैसे भिन्न है?
A1: E20 पेट्रोल में 20% इथेनॉल और 80% पेट्रोल का मिश्रण होता है, जिससे इसके दहन गुण और ऊर्जा घनत्व में बदलाव आता है।

Q2: सरकार ने अब तक E20 नीति के संबंध में क्या कदम उठाए हैं?
A2: सरकार ने 2023 में E20 रोलआउट शुरू किया, परंतु अभी तक इसके प्रभावी निगरानी और मूल्यांकन के लिए स्पष्ट ढाँचा नहीं बनाया गया है।