आसाम के रेलवे नेटवर्क का 100% इलेक्ट्रिफिकेशन पूरा हो गया है, जिससे ट्रैफिक क्षमता बढ़ेगी और यात्रियों को तेज, विश्वसनीय और पर्यावरणीय अनुकूल सेवाएँ मिलेंगी। इस कदम के तहत लुम्डिंग-बदर्पूर हिल सेक्शन को भी इलेक्ट्रिफ़ किया गया, जिससे पूरे राज्य में बिना ट्रैक्शन बदलाव के इलेक्ट्रिक ट्रेनें चल सकेंगी।

  • आसाम के 2,589 किमी रेलमार्ग अब पूरी तरह इलेक्ट्रिक
  • लुम्डिंग-बदर्पूर हिल सेक्शन का इलेक्ट्रिफिकेशन पूरा हुआ
  • यात्रियों को तेज, विश्वसनीय और पर्यावरणीय अनुकूल सेवाएँ मिलने की उम्मीद

आसाम के 2,589 किमी के ब्रॉड गेज नेटवर्क का 100% इलेक्ट्रिफिकेशन अब आधिकारिक तौर पर पूरा हो गया है, जिससे राज्य के भीतर और बाहर दोनों ही दिशा में ट्रैफिक क्षमता और विश्वसनीयता में उल्लेखनीय सुधार की संभावना है।

नॉर्थईस्ट फ्रंटियर रेलवे (NFR) ज़ोन के प्रमुख अधिकारी, कापिन्ज़ल किशोर शर्मा, ने भारतीय एक्सप्रेस को बताया कि लुम्डिंग-बदर्पूर हिल सेक्शन की पूरी तरह से विद्युत् आपूर्ति के साथ, अब किसी भी ट्रेन को ट्रैक्शन बदलने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। 132 KV ट्रांसमिशन लाइन, जो हाफ़लॉन्ग ग्रिड सब-स्टेशन को न्यू हाफ़लॉन्ग ट्रैक्शन सब-स्टेशन से जोड़ती है, को 20 जून को सक्रिय किया गया।

इलेक्ट्रिफ़िकेशन के इस ऐतिहासिक मील का पत्थर 1925 में भारत के पहले इलेक्ट्रिक ट्रेन के परिचालन के बाद से 101 साल के विकास को दर्शाता है, जब मुंबई के वर्जीनिया टर्मिनस और कुरला हार्बर के बीच 1,500 V DC प्रणाली पर पहली इलेक्ट्रिक ट्रेन चलायी गई थी।

पूरी तरह से इलेक्ट्रिफ़्ड नेटवर्क से न केवल ट्रैक्शन स्विचिंग के समय और लागत में कमी आएगी, बल्कि लोकोमोटिव के रख-रखाव और ईंधन लागत में भी 20% तक की बचत संभव है। इसके अतिरिक्त, तेज ट्रैक्शन से यात्रा समय में 15% तक की कमी की उम्मीद है।

पर्यावरणीय दृष्टिकोण से यह कदम जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता को कम करेगा और कार्बन उत्सर्जन में कमी लाएगा, जिससे राज्य की ऊर्जा दक्षता और सतत विकास लक्ष्यों को समर्थन मिलेगा।

यात्रियों के लिए, इसका अर्थ है अधिक विश्वसनीय समय-सारणी, कम विलंब और एक साफ-सुथरी यात्रा अनुभव। इसके अलावा, इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन की बढ़ी हुई उपलब्धता से लंबी दूरी के कनेक्शन पर भी लाभ होगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 2026 में घोषित तीन प्रमुख इलेक्ट्रिफ़िकेशन परियोजनाओं—रंगिया-मुर्कोंगसेलेक, चपारमुख-डिब्रुगड़ और बदर्पूर-शिलचर—की सफल पूर्णता के साथ, आसाम के रेल नेटवर्क का यह नया अध्याय भारत के व्यापक रेल इलेक्ट्रिफ़िकेशन अभियान का एक प्रमुख हिस्सा है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह इलेक्ट्रिफ़िकेशन न केवल परिचालन लागत में 20% तक की बचत लाएगा, बल्कि यात्रियों के लिए यात्रा समय में 15% की कमी भी करेगा, जिससे आसाम की आर्थिक गतिशीलता में नई ऊर्जा आएगी।

BozokMedia का विश्लेषण दर्शाता है कि इलेक्ट्रिफ़िकेशन से परिचालन लागत में 20% तक की बचत और यात्रा समय में 15% की कमी संभव है।
Did You Know?: 1925 में भारत की पहली इलेक्ट्रिक ट्रेन मुंबई के वर्जीनिया टर्मिनस और कुरला हार्बर के बीच 1,500 V DC प्रणाली पर चलायी गई थी।

Frequently Asked Questions

Q1: इस इलेक्ट्रिफिकेशन से ट्रेन के किराए पर क्या असर पड़ेगा?
A1: किराए में कोई बदलाव नहीं, पर यात्रा समय कम हो सकता है।

Q2: क्या सभी ट्रेनें इलेक्ट्रिक हो जाएंगी?
A2: सभी ट्रेनें इलेक्ट्रिक नहीं होंगी, पर अधिकांश मुख्य मार्ग पर इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन उपलब्ध होगा।