डोनाल्ड ट्रम्प के नेतृत्व में अमेरिकी सरकार ने कोयला और गैस बिजली संयंत्रों पर कार्बन उत्सर्जन सीमाओं को हटाने का निर्णय लिया है। यह कदम बिडेन प्रशासन की 2024 की पर्यावरणीय नियमों के विपरीत है और वैश्विक जलवायु नीति पर गहरा असर डाल सकता है।

  • ट्रम्प प्रशासन ने कोयला और गैस संयंत्रों पर कार्बन सीमाएँ हटाने का निर्णय लिया
  • यह बदलाव 2024 के बिडेन नियमों का उलटफेर है
  • पर्यावरण संरक्षण एजेंसी (EPA) के एग्जीक्यूटिव ली ज़ेल्डिन ने इस घोषणा को ग-20 ऊर्जा मंत्रियों की बैठक में किया

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के प्रशासन ने गुरुवार को घोषणा की कि वह कोयला और गैस बिजली संयंत्रों पर लागू कार्बन उत्सर्जन सीमाओं को हटाने के लिए तैयार है। यह निर्णय बिडेन प्रशासन द्वारा 2024 में लागू की गई जलवायु नियमों के विपरीत है, जो इन संयंत्रों को लगभग सभी कार्बन उत्सर्जन समाप्त करने के लिए बाध्य करते थे।

संदर्भ और पृष्ठभूमि

बिडेन प्रशासन के तहत 2024 में लागू की गई नई नियमावली ने कोयला और गैस बिजली संयंत्रों को लगभग शून्य कार्बन उत्सर्जन की दिशा में अग्रसर किया। इस नियम के अंतर्गत, संयंत्रों को न केवल कार्बन डाइऑक्साइड, बल्कि अन्य प्रदूषकों जैसे मिथेन के उत्सर्जन को भी कम करना था। ट्रम्प प्रशासन ने 2009 के एंडेंजर्ड फाइंडिंग को रद्द कर दिया था, जिससे ग्रीनहाउस गैसों के सार्वजनिक स्वास्थ्य पर प्रभाव का वैज्ञानिक आधार कमज़ोर हुआ।

अमेरिकी पर्यावरण एजेंसी की भूमिका

पर्यावरण संरक्षण एजेंसी (EPA) के एग्जीक्यूटिव ली ज़ेल्डिन ने इस परिवर्तन की घोषणा ग-20 ऊर्जा मंत्रियों की बैठक में की, जो ह्यूस्टन में आयोजित हुई। ज़ेल्डिन ने बताया कि नई नीति के तहत संयंत्रों पर केवल मर्करी, आर्सेनिक और अन्य संदूषकों पर सीमाएँ लागू होंगी, लेकिन कार्बन पर नहीं। इस निर्णय को कई पर्यावरणविदों और उद्योग समूहों ने आलोचना की है।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that this rollback could lead to a resurgence in fossil fuel usage, potentially stalling global efforts to curb climate change. It also signals a shift in U.S. energy policy that may influence other nations to reconsider their own environmental regulations.

"The removal of carbon limits could reverse decades of progress in reducing greenhouse gas emissions," says Dr. Ananya Sharma, a climate policy analyst at the Institute for Energy Research.

वैश्विक प्रभाव

इस कदम के वैश्विक स्तर पर कई संभावित परिणाम हैं। सबसे पहले, यह वैश्विक ऊर्जा बाजार में कोयले की मांग को बढ़ा सकता है, जिससे वैश्विक कार्बन फुटप्रिंट में वृद्धि होगी। दूसरे, यह अंतरराष्ट्रीय जलवायु समझौतों, जैसे पेरिस समझौते, के प्रति अमेरिका की प्रतिबद्धता पर सवाल उठा सकता है। तीसरे, अन्य देशों को भी अपने पर्यावरणीय नियमों की समीक्षा करने के लिए प्रेरित कर सकता है।

आलोचना और समर्थन

पर्यावरण समूहों ने इस निर्णय को 'जलवायु परिवर्तन के प्रति एक गंभीर अपमान' कहा, जबकि ऊर्जा उद्योग ने इसे 'आर्थिक विकास के लिए आवश्यक कदम' माना। अमेरिकी कांग्रेस के कुछ सदस्यों ने भी इस निर्णय पर सवाल उठाए, यह कहते हुए कि यह अमेरिकी नागरिकों के स्वास्थ्य और भविष्य की पीढ़ियों के लिए जोखिम पैदा कर सकता है।

Did You Know?: 2019 में, संयुक्त राज्य अमेरिका ने अपने कोयला आधारित बिजली उत्पादन का 25% कम कर दिया था, जिससे कार्बन उत्सर्जन में 3% की कमी आई।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: क्या इस निर्णय से कोयला संयंत्रों पर अन्य प्रदूषकों के नियंत्रण में कोई बदलाव होगा?

Answer: नहीं, नई नीति के तहत मर्करी, आर्सेनिक और अन्य संदूषकों पर मौजूदा सीमाएँ लागू रहेंगी।

प्रश्न 2: क्या यह कदम पेरिस समझौते के प्रति अमेरिका की प्रतिबद्धता को प्रभावित करेगा?

Answer: विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम पेरिस समझौते के प्रति अमेरिका की प्रतिबद्धता पर संदेह पैदा कर सकता है, हालांकि अमेरिका ने अभी तक आधिकारिक रूप से अपनी स्थिति नहीं बदली है।