कर्नाटक सरकार ने बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणालियों (BESS) की तैनाती को तेज करने का आग्रह किया है, क्योंकि पांच बड़े प्रोजेक्ट्स 2026 के अंत तक ही संचालन में आने की संभावना है। यह कदम बढ़ती सौर ऊर्जा और बिजली की मांग के बीच संतुलन बनाने के लिए महत्वपूर्ण है।
- पांच बड़े BESS प्रोजेक्ट्स का पूरा होना 2026 के अंत तक सीमित है
- कर्नाटक के ऊर्जा संकट को कम करने में BESS की भूमिका अहम है
- कई प्रोजेक्ट्स में देरी से बिजली की कीमतें बढ़ रही हैं
कर्नाटक में बिजली की आपूर्ति को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच, कर्नाटक स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड (KSEB) को बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणालियों (BESS) की तैनाती को तेज करने के लिए एक नियामक पैनल द्वारा निर्देशित किया गया है। पाँच प्रमुख प्रोजेक्ट्स—मायलाट्टी, मुईलरिया, श्रीकांतपुरम, एरिएकोड और पोथेंकोड—की स्थापना में देरी से यह स्पष्ट हो गया है कि 2026 के अंत तक ही ये प्रणालियाँ संचालन में आ सकती हैं।
मायलाट्टी प्रोजेक्ट, जिसकी क्षमता 125 मेगावाट/500 मेगावाट-घंटा है, और मुईलरिया प्रोजेक्ट, 15 मेगावाट/60 मेगावाट-घंटा, दोनों ही कासारगोड जिले में स्थित हैं। ये प्रोजेक्ट्स सोलर एनर्जी कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (SECI) और एनएचपीसी लिमिटेड द्वारा लागू किये जा रहे हैं।
श्रीकांतपुरम (40 MW/160 MWh) और एरिएकोड (30 MW/120 MWh) प्रोजेक्ट्स, भी एनएचपीसी लिमिटेड के माध्यम से, नवंबर 2026 तक चालू होने की उम्मीद है। हालांकि, पोथेंकोड प्रोजेक्ट में लगातार विलंब ने कर्नाटक के विद्युत संकट को और भी गंभीर बना दिया है।
क्यों यह महत्वपूर्ण है
बैकअप बैटरियों के बिना, कर्नाटक की बढ़ती सौर ऊर्जा उत्पादन को रात के उच्च मांग वाले घंटों में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता, जिससे KSEB को महँगे स्रोतों से बिजली खरीदनी पड़ती है। यह स्थिति उपभोक्ताओं के बिलों पर अतिरिक्त भार डालती है। BozokMedia विश्लेषण दिखाता है कि यदि BESS समय पर चालू हो जाएँ तो ऊर्जा लागत में 15-20% तक कमी आ सकती है।
"BESS की समय पर तैनाती से न केवल बिजली की कीमतों में गिरावट आएगी बल्कि कर्नाटक के हरित ऊर्जा लक्ष्यों को भी पूरा किया जा सकेगा," कहते हैं ऊर्जा विशेषज्ञ डॉ. रितिक पाटिल।
कर्नाटक सरकार ने इस संकट को हल करने के लिए NTPC लिमिटेड और अन्य स्रोतों से अतिरिक्त बिजली खरीदने की बात की है। साथ ही, पावर कर्ब्स के दौरान भी KSEB को अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करने के लिए दिन के दौरान जल ऊर्जा उत्पादन को सीमित करने का निर्देश दिया गया है।
Frequently Asked Questions
1. क्या BESS प्रोजेक्ट्स की देरी से उपभोक्ताओं पर क्या असर पड़ेगा?
उपभोक्ताओं को महँगे पावर खरीद के कारण बिलों में वृद्धि का सामना करना पड़ेगा, विशेषकर शाम के उच्च मांग वाले घंटों में।
2. कर्नाटक सरकार ने इस संकट के लिए क्या कदम उठाए हैं?
सरकार ने BESS की तैनाती को तेज करने, NTPC से अतिरिक्त बिजली खरीदने और जल ऊर्जा उत्पादन को पुनर्वितरित करने के कदम उठाए हैं।