गोंडवाना आर्ट प्रोजेक्ट ने हैदराबाद में 'मूल - द ओरिजिन' प्रदर्शनी के माध्यम से आदिवासी कला को समकालीन सौंदर्यशास्त्र के साथ पेश किया है। यह प्रदर्शनी परंपरा और आधुनिकता के बीच एक सेतु का काम कर रही है।
- हैदराबाद के स्पिरिट कनेक्ट में गोंड, भील, वारली और नागा जनजातियों की 50 कलाकृतियों का प्रदर्शन।
- परंपरागत कला को आधुनिक रंगों और कंपोजिशन के साथ नया रूप दिया गया है।
- NID और NIFT जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों ने कलाकारों को मेंटरशिप प्रदान की।
हैदराबाद के फिल्म नगर स्थित स्पिरिट कनेक्ट में आयोजित 'मूल - द ओरिजिन' (MŪL - The Origin) प्रदर्शनी आदिवासी कला के प्रति एक नया दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है। गोंडवाना आर्ट प्रोजेक्ट और आर्ट कनेक्ट के सहयोग से आयोजित इस प्रदर्शनी में 12 कलाकारों द्वारा बनाई गई 50 शानदार कलाकृतियां प्रदर्शित की गई हैं, जो गोंड, भील, वारली और नागा जनजातियों की समृद्ध विरासत को दर्शाती हैं।
गोंडवाना आर्ट प्रोजेक्ट के संस्थापक सुंदीप भंडारी के अनुसार, महामारी के बाद से हैदराबाद में इस तरह की 'समकालीन आदिवासी कला' की मांग में काफी वृद्धि हुई है। उन्होंने बताया कि आदिवासी और लोक कला में एक तरह का ठहराव आ गया था, जिसे दूर करने के लिए नवाचार (innovation) की आवश्यकता थी। इस परियोजना का उद्देश्य मूल कला की आत्मा को सुरक्षित रखते हुए उसे आधुनिक बाजार, विशेषकर इंटीरियर डिजाइन क्षेत्र के अनुकूल बनाना है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह पहल केवल कला का प्रदर्शन नहीं है, बल्कि आदिवासी कलाकारों के आर्थिक सशक्तिकरण का एक मॉडल है। जब पारंपरिक कला को आधुनिक रंगों (जैसे वारली कला में पारंपरिक गेरू के बजाय इंडिगो का उपयोग) के साथ जोड़ा जाता है, तो यह वैश्विक खरीदारों और आधुनिक घरों के लिए अधिक आकर्षक हो जाती है, जिससे कलाकारों की आय में वृद्धि होती है।
"हमारा उद्देश्य कला के मूल स्वरूप को बदलना नहीं, बल्कि उसकी प्रस्तुति और रंग पैलेट को परिष्कृत करना है ताकि यह समकालीन सौंदर्यशास्त्र के साथ मेल खा सके।"
इस परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता इसका प्रशिक्षण मॉडल है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन (NID) और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (NIFT) के संकायों ने कलाकारों के लिए कार्यशालाएं आयोजित कीं। दिलचस्प बात यह है कि ये कार्यशालाएं कलाकारों के गांवों के करीब आयोजित की गईं ताकि वे अपनी कृषि और सामुदायिक गतिविधियों से अलग न हों।
गोंडवाना आर्ट प्रोजेक्ट ने अपनी पहुंच केवल भारत तक सीमित नहीं रखी है। इस प्रोजेक्ट की कलाकृतियां पहले ही इंडिया आर्ट फेयर, मुंबई की जहांगीर आर्ट गैलरी और ऑस्ट्रेलिया के न्यू इंग्लैंड रीजन आर्ट म्यूजियम में प्रदर्शित की जा चुकी हैं। हैदराबाद की इस प्रदर्शनी में विशेष रूप से नागालैंड के कलाकारों द्वारा बनाई गई दो मूर्तियों पर ध्यान देना आवश्यक है।
| विशेषता | पारंपरिक आदिवासी कला | समकालीन (MŪL) दृष्टिकोण |
|---|---|---|
| रंग पैलेट | प्राकृतिक रंग (जैसे गेरू, मिट्टी) | सॉफ्ट और आधुनिक पैलेट (जैसे इंडिगो) |
| बाजार | स्थानीय हाट और क्राफ्ट मेले | इंटीरियर डिजाइन और वैश्विक गैलरी |
| प्रशिक्षण | पीढ़ी दर पीढ़ी हस्तांतरित | NID/NIFT द्वारा डिजाइन हस्तक्षेप |
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: 'मूल - द ओरिजिन' प्रदर्शनी कहाँ और कब तक है?
यह प्रदर्शनी 10 से 13 सितंबर तक हैदराबाद के फिल्म नगर स्थित स्पिरिट कनेक्ट में आयोजित की जा रही है।
प्रश्न 2: गोंडवाना आर्ट प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका मुख्य उद्देश्य आदिवासी कला के मूल लोकाचार को बनाए रखते हुए उसमें आधुनिक डिजाइन हस्तक्षेप करना है ताकि कलाकारों को नए बाजार मिल सकें।