यूट्यूबर सौरव जोशी ने अपने मर्सिडीज‑बेंज SUV की ई20 पेट्रोल पर कम माइलेज का कारण इंधन नहीं, बल्कि इंजन में समस्या बताया। मर्सिडीज‑बेंज इंडिया ने कहा कि सभी बीएस‑VI पेट्रोल वाहन ई20 के साथ पूरी तरह संगत हैं, और कंपनी ने ग्राहक सुरक्षा की प्रतिबद्धता दोहराई।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • सौरव जोशी ने ई20 पेट्रोल को दोषी नहीं ठहराया, इंजन समस्या को कारण बताया
  • मर्सिडीज‑बेंज इंडिया ने सभी बीएस‑VI पेट्रोल वाहनों की ई20 संगतता की पुष्टि की
  • इन्फ्लुएंसर की विश्वसनीयता और सतत मोटरगाड़ी नीति पर विमर्श जारी

भारत में ऑटो‑इन्फ्लुएंसर सौरव जोशी ने हाल ही में अपने मर्सिडीज‑बेंज SUV पर ई20 पेट्रोल का प्रयोग करने के बाद मिलने वाले माइलेज को लेकर विवाद उत्पन्न किया था। प्रारम्भिक वीडियो में वह ई20 ईंधन के कारण ‘कम माइलेज’ का आरोप लगा रहे थे, जिससे कई दर्शकों ने ईंधन की गुणवत्ता और वाहन की संगतता पर सवाल उठाए।

पृष्ठभूमि और बीएस‑VI मानक

ई20 पेट्रोल, यानी 20% बायोडीज़ेल मिश्रण, भारत में अप्रैल 2023 से लागू बीएस‑VI (बोरोनॉमिक स्टैंडर्ड) मानकों के तहत अनिवार्य हो गया। यह कदम पर्यावरणीय प्रदूषण को कम करने और फॉसिल फ्यूल पर निर्भरता घटाने के लिए उठाया गया था। मर्सिडीज‑बेंज इंडिया ने पहले ही घोषणा की थी कि उसकी सभी बीएस‑VI पेट्रोल वाहन, जिसमें SUV भी शामिल हैं, ई20 ईंधन के साथ बिना किसी परिवर्तन के चलाए जा सकते हैं।

इंजिन समस्या का खुलासा

विवाद के बाद सौरव जोशी ने एक अतिरिक्त वीडियो अपलोड किया, जिसमें उन्होंने स्पष्ट किया कि माइलेज में गिरावट का वास्तविक कारण इंजन में एक तकनीकी समस्या था, न कि ई20 पेट्रोल स्वयं। उन्होंने बताया कि इंधन की गुणवत्ता या मिश्रण अनुपात ने कोई प्रभाव नहीं डाला, बल्कि एक संवेदी सेंसर की गड़बड़ी के कारण ईंधन की खपत बढ़ी। इस स्पष्टीकरण के बाद उन्होंने वह विवादास्पद भाग कट कर दिया, जिससे दर्शकों को ग़लतफहमी से बचा जा सके।

कंपनी की प्रतिक्रिया और ग्राहक सुरक्षा

मर्सिडीज‑बेंज इंडिया ने पुनः पुष्टि की कि उसकी सभी बीएस‑VI पेट्रोल मॉडल ई20 के साथ पूर्णतः संगत हैं और कंपनी ग्राहक सुरक्षा तथा सतत गतिशीलता को प्राथमिकता देती है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई वाहन मालिक ई20 से जुड़ी समस्याओं का सामना करता है, तो उसे तुरंत अधिकृत सर्विस सेंटर में ले जाना चाहिए।

इन्फ्लुएंसर की विश्वसनीयता पर प्रभाव

इस घटना ने सोशल मीडिया पर इन्फ्लुएंसर की जिम्मेदारी और उनके द्वारा साझा किए गए तकनीकी जानकारी की सटीकता पर चर्चा को जन्म दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यूट्यूबर्स को वाहन‑संबंधी परीक्षणों में अधिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए, ताकि दर्शकों को गलत जानकारी न मिले और ब्रांड की छवि सुरक्षित रहे।

अंततः, सौरव जोशी का यह अनुभव दर्शाता है कि तकनीकी मुद्दों को तुरंत पहचान कर सार्वजनिक करना, न केवल व्यक्तिगत विश्वसनीयता को बचाता है, बल्कि उद्योग की समग्र भरोसेमंदिता को भी सुदृढ़ करता है।