एयर इंडिया के एक पायलट के गांजा (marijuana) परीक्षण के सकारात्मक परिणाम के बाद, नागरिक उड्डयन मंत्रालय अब सभी पायलटों के लिए वार्षिक अनिवार्य ड्रग परीक्षण का प्रस्ताव कर रहा है।
- नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने पायलटों के लिए वार्षिक अनिवार्य ड्रग परीक्षण का सुझाव दिया है।
- एयर इंडिया के एक पायलट का परीक्षण गांजे (marijuana) के लिए सकारात्मक आया था।
- वर्तमान नियमों के तहत केवल 10% पायलटों का ही रैंडम परीक्षण किया जाता है।
- हाल ही में एयर इंडिया की एक उड़ान में ऊंचाई में अचानक गिरावट के कारण यात्री घायल हुए थे।
भारत में विमानन सुरक्षा को और अधिक कड़ा करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए, नागरिक उड्डयन मंत्रालय (MoCA) ने सभी पायलटों के लिए साल में एक बार अनिवार्य ड्रग परीक्षण करने का प्रस्ताव दिया है। यह प्रस्ताव नागरिक उड्डयन मंत्री के. राममोहन नायडू द्वारा दिया गया है, जो हाल ही में एयर इंडिया की एक उड़ान के दौरान हुई गंभीर घटना के बाद आया है।
गौरतलब है कि 4 अगस्त को फुकेत से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की एक उड़ान के दौरान विमान की ऊंचाई में अचानक 300 फीट की गिरावट आई थी, जिसमें 20 यात्री और 4 चालक दल के सदस्य घायल हो गए थे। जांच में सामने आया कि उस उड़ान के कैप्टन का ड्रग टेस्ट गांजे (marijuana) के लिए सकारात्मक आया था। इस घटना ने विमानन उद्योग में सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्यों यह मामला महत्वपूर्ण है
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह प्रस्ताव केवल अनुशासन का मामला नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर यात्रियों की जीवन सुरक्षा से जुड़ा है। वर्तमान में, DGCA के नियमों के तहत केवल 10% पायलटों का ही रैंडम ड्रग टेस्ट किया जाता है। यदि सरकार इस नियम को बदलकर 100% वार्षिक परीक्षण लागू करती है, तो यह विमानन क्षेत्र में सुरक्षा की एक नई परत जोड़ेगा, हालांकि इसके परिचालन संबंधी प्रभावों (operational impacts) पर अभी भी बहस जारी है।
पायलटों का नशा मुक्त होना केवल एक नियम नहीं, बल्कि आसमान में हजारों यात्रियों के भरोसे की नींव है।
एयर इंडिया ने इस घटना के बाद अपने लगभग 5,000 पायलटों का एक बार अनिवार्य परीक्षण शुरू कर दिया है। वहीं, पायलटों के संगठन फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स (FIP) ने भी मांग की है कि रैंडम टेस्टिंग के दायरे को 10% से बढ़ाकर कम से कम 25% किया जाना चाहिए।
ऐतिहासिक संदर्भ और नियम
वर्तमान में, DGCA के नियमों के तहत पायलटों और एयर ट्रैफिक कंट्रोलरों के मूत्र के नमूनों में छह श्रेणियों के मादक पदार्थों की जांच की जाती है, जिसमें कोकीन, ओपिएट्स और कैनबिस शामिल हैं। यदि प्रारंभिक स्क्रीनिंग 'नॉन-नेगेटिव' आती है, तो पायलट को तुरंत ड्यूटी से हटा दिया जाता है और पुष्टिकरण परीक्षण (confirmatory test) का इंतजार किया जाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: वर्तमान में पायलटों का ड्रग टेस्ट कैसे होता है?
उत्तर: वर्तमान नियमों के अनुसार, विमानन कर्मियों के केवल 10% हिस्से का प्रति वर्ष रैंडम ड्रग टेस्ट किया जाता है।
प्रश्न 2: एयर इंडिया की घटना में क्या हुआ था?
उत्तर: 4 अगस्त को एक एयरबस A320 विमान की ऊंचाई अचानक गिर गई थी, जिसमें कई यात्री घायल हुए थे और बाद में पायलट के गांजे के सेवन की पुष्टि हुई थी।