भोपाळ के एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर को ‘मास्ट मनी’ मोबाइल लोन ऐप के जरिए लगभग 5 लाख उपयोगकर्ताओं से ₹200 करोड़ की चोरी के आरोप में गिरफ्तार किया गया। ऐप ने तुरंत ऋण वादों के साथ फोन डेटा का दुरुपयोग कर भारी ब्याज व धमकियाँ लगाई।
भोपाळ के निवासी कमील सिद्दीकी को नागपुर साइबर पुलिस ने 9 जुलाई को ‘मास्ट मनी’ नामक मोबाइल लोन एप के जरिए ₹200 करोड़ की धोखाधड़ी में संलिप्त होने के आरोप पर गिरफ्तार कर लिया। यह केस भारत में चल रहे डिजिटल ऋण स्कैम के बड़े पैमाने पर एक नया अध्याय है।
स्कैम की कार्यप्रणाली
एप ने सोशल मीडिया पर “₹15,000 तक के त्वरित ऑनलाइन ऋण” का वादा करके लाखों डाउनलोड आकर्षित किए। एक बार इंस्टॉल होने के बाद, ऐप ने उपयोगकर्ताओं के फोन डेटा और संपर्क सूचियों तक पहुँच प्राप्त कर ली, जिससे धोखाधड़ी करने वाले को उपयोगकर्ताओं को अधिक ब्याज और फर्जी शुल्क वसूलने का अवसर मिला। रिपोर्टों के अनुसार, ₹15,000 के ऋण पर 25,000 से 50,000 रुपये तक का भुगतान करना अनिवार्य कर दिया गया, और यदि भुगतान नहीं किया गया तो व्यक्तिगत जानकारी सार्वजनिक करने की धमकी दी गई।
जांच और व्यापक नेटवर्क
नागपुर के दो निवासियों द्वारा साइबर पुलिस में दर्ज की गई शिकायतों के बाद, तकनीकी साक्ष्य जुटाकर सिद्दीकी की पहचान और गिरफ्तारी की गई। पुलिस अब इस धोखाधड़ी के पीछे के बड़े नेटवर्क, अन्य सह-संगठित सदस्यों और ₹200 करोड़ की धनराशि के ट्रैकिंग पर काम कर रही है।
उपभोक्ताओं पर प्रभाव और नियामक प्रतिक्रिया
यह घटना डिजिटल ऋण प्लेटफार्मों पर बढ़ती अविश्वास को उजागर करती है। भारतीय रिज़र्व बैंक और साइबर सिक्योरिटी एजेंसी को ऐसे स्कैम पर कड़ी निगरानी और सख्त नियम लागू करने का आग्रह किया जा रहा है। उपभोक्ताओं को ऐप इंस्टॉल करने से पहले उसकी वैधता और डेटा नीतियों की जाँच करने की चेतावनी दी गई है।
भविष्य की रोकथाम
इस तरह के धोखाधड़ी से निपटने के लिए, सरकार को मोबाइल ऐप मार्केटप्लेस में पंजीकरण और सत्यापन प्रक्रियाओं को सुदृढ़ करना चाहिए। साथ ही, वित्तीय साक्षरता कार्यक्रमों के माध्यम से जनता को डिजिटल ऋण के जोखिमों से अवगत कराना अनिवार्य है।