अलाहाबाद उच्च न्यायालय ने मिनोर्स के रोब्लॉक्स और समान ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफ़ॉर्म तक पहुँच को सीमित करने वाले सार्वजनिक हित याचिका (PIL) पर मंत्रालय से जवाब माँगा है। यह याचिका कई लोकप्रिय गेम्स को भी सूचीबद्ध करती है और सुरक्षा‑संबंधी प्रतिबंधों की मांग करती है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • रोब्लॉक्स व समान प्लेटफ़ॉर्म पर नाबालिगों की पहुँच रोकने के लिए PIL दायर
  • मंत्रालय से जवाब माँगा गया तथा उच्च‑स्तरीय विशेषज्ञ समिति के गठन की मांग
  • स्कूल‑आधारित जागरूकता कार्यक्रम और नियामक उपायों की सिफारिश

अलाहाबाद हाई कोर्ट ने 9 जुलाई, 2026 को एक सार्वजनिक हित याचिका (PIL) पर नोटिस जारी किया, जिसमें रोब्लॉक्स और अन्य वर्चुअल गेमिंग प्लेटफ़ॉर्म पर नाबालिगों की पहुँच को प्रतिबंधित करने की माँग की गई है। इस याचिका को कोर्ट के एक अनुभागीय बेंच, न्यायाधीश राजन रॉय एवं मंजीव शुक्ला ने सुना।

याचिका के मुख्य बिंदु

अलाहाबाद हाई कोर्ट की अधिवक्ता रानी सिंह द्वारा दायर याचिका में केवल रोब्लॉक्स ही नहीं, बल्कि PUBG, Manhunt, Free Fire MAX, Grand Theft Auto, Battlefield और Fortnite जैसे लोकप्रिय गेम्स का भी उल्लेख किया गया है। याचिकाकर्ता का कहना है कि इन प्लेटफ़ॉर्म पर रीयल‑टाइम सामाजिक इंटरैक्शन, उपयोगकर्ता‑जनित गेम्स, एवरीचर, वर्चुअल मुद्रा लेन‑देन और अनियंत्रित चैटरूम्स बच्चों को ऑनलाइन सुरक्षा जोखिमों के प्रति उजागर कर सकते हैं।

कानूनी पृष्ठभूमि और न्यायालय की प्रतिक्रिया

न्यायालय ने इस मुद्दे पर केंद्र के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) को विस्तृत उत्तर देने का आदेश दिया है। साथ ही, याचिका में एक उच्च‑स्तरीय समिति के गठन की भी माँग की गई है, जिसमें बाल मनोवैज्ञानिक, साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ, एआई मॉडरेशन विशेषज्ञ और कानून प्रवर्तन अधिकारी शामिल होंगे, ताकि इन प्लेटफ़ॉर्म से जुड़े जोखिमों का मूल्यांकन किया जा सके।

जागरूकता और नियामक उपाय

याचिकाकर्ता ने स्कूलों और शैक्षणिक संस्थानों में अनिवार्य कार्यशालाएँ, सेमिनार और जागरूकता अभियान चलाने की भी अपील की है। उनका तर्क है कि बच्चों, शिक्षकों और अभिभावकों को ऑनलाइन गेमिंग के संभावित मनोवैज्ञानिक, व्यवहारिक और सुरक्षा जोखिमों के बारे में सूचित करना आवश्यक है। यह पहल केवल प्रतिबंध नहीं, बल्कि नियामक ढाँचा, आयु‑उपयुक्त सामग्री मॉडरेशन और सख्त सरकारी निगरानी की आवश्यकता पर बल देती है।

भविष्य की दिशा

यदि मंत्रालय इस नोटिस का सकारात्मक जवाब देता है, तो भारत में ऑनलाइन गेमिंग के नियमन में एक नया चरण शुरू हो सकता है। यह कदम नाबालिगों की मनोवैज्ञानिक भलाई की रक्षा के साथ-साथ डिजिटल उद्योग में जिम्मेदार विकास को भी प्रोत्साहित करेगा। प्रतिबंधों की बजाय नियामक उपायों पर ज़ोर देना, उद्योग और उपभोक्ता दोनों के हित में एक संतुलित नीति की ओर संकेत करता है।