अल्लाहाबाद हाई कोर्ट ने एक सार्वजनिक हित याचिका (PIL) पर चर्चा की, जिसमें रोब्लॉक्स और समान ऑनलाइन गेम्स को नाबालिगों के लिए प्रतिबंधित करने की मांग की गई है। न्यायालय ने केंद्र सरकार को इस मुद्दे पर विस्तृत उत्तर देने का निर्देश दिया, जबकि बाल मनोवैज्ञानिक, साइबर विशेषज्ञ और कानून प्रवर्तन के मिश्रित आयोग की सिफारिश की गई है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • रोब्लॉक्स जैसे गेम्स को नाबालिगों के लिए प्रतिबंधित करने की मांग पर कोर्ट ने केंद्र से जवाब मांगा।
  • बाल मनोवैज्ञानिक, साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ और विधायकों के मिश्रित आयोग की स्थापना का प्रस्ताव।
  • ऑनलाइन गेमिंग की लत से शारीरिक‑मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों की व्यापक रिपोर्ट पेश।

अल्लाहाबाद हाई कोर्ट ने रानी सिंग द्वारा दायर सार्वजनिक हित याचिका (PIL) पर सुनवाई की, जिसमें रोब्लॉक्स और अन्य समान ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफ़ॉर्म को नाबालिगों की पहुँच से रोकने की माँग की गई है। इस याचिका में बच्चों के मनोवैज्ञानिक कल्याण, ऑनलाइन सुरक्षा और हानिकारक सामग्री के एक्सपोज़र को लेकर गंभीर चिंताएँ उठाई गई हैं।

पृष्ठभूमि और कानूनी प्रवृत्ति

पिछले कुछ वर्षों में भारत में डिजिटल गेमिंग का विस्तार तेज़ी से हुआ है, परन्तु इससे जुड़ी नाबालिगों की लत और साइबर‑बुलीइंग के मामलों में बढ़ोतरी भी देखी गई है। न्यायालय ने पहले भी बाल शोषण और बाल विवाह जैसे मुद्दों पर कड़े आदेश जारी किए हैं; अब यह मामला ऑनलाइन गेमिंग की संभावित हानि को लेकर एक नया मोड़ दर्शाता है।

स्वास्थ्य एवं सामाजिक प्रभाव

चंडीगढ़ के पीजीआईएमआर के मनोविज्ञान विभाग द्वारा किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि 15.9 % युवा इंटरनेट की लत से ग्रस्त हैं, जिससे अवसाद और चिंता में उल्लेखनीय वृद्धि होती है। विशेषज्ञों ने बताया कि लगातार गेमिंग से नींद, भूख और शारीरिक गतिविधियों में बाधा आती है, जबकि बच्चे वर्चुअल दुनिया में मिलने वाली मान्यता पर अत्यधिक निर्भर हो जाते हैं।

सरकारी प्रतिक्रिया एवं आयोग का प्रस्ताव

कोर्ट ने मंत्रालय सूचना प्रौद्योगिकी (MeitY) और अन्य संबंधित विभागों से विस्तृत जवाब देने को कहा है। याचिकाकर्ता ने एक उच्च‑स्तरीय आयोग के गठन की विनती की है, जिसमें बाल मनोवैज्ञानिक, साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ, एआई मॉडरेटर और कानून प्रवर्तन अधिकारी शामिल हों। इस आयोग को जोखिम मूल्यांकन, जागरूकता अभियान और तत्काल सुरक्षा उपायों की सिफारिश करने का काम सौंपा जाएगा।

भविष्य की सम्भावनाएँ

यदि केंद्र इस याचिका को स्वीकार करता है, तो रोब्लॉक्स जैसे प्लेटफ़ॉर्म पर आयु‑आधारित प्रतिबंध, कंटेंट मॉडरेशन के सख्त मानक और स्कूल‑आधारित डिजिटल साक्षरता कार्यक्रम लागू किए जा सकते हैं। यह कदम न केवल बच्चों की सुरक्षा को बढ़ाएगा, बल्कि भारत में डिजिटल गेमिंग नियमन के ढाँचे को भी पुनः परिभाषित करेगा।