कर्नाटक में बिटकॉइन घोटाले की जांच में राज्य सरकार ने पुलिस अधिकारियों पर मुकदमे की स्वीकृति नहीं दी, जिससे विशेष जांच टीम (SIT) ने चार पुलिस अधिकारियों के खिलाफ मामलों को बंद कर दिया, जबकि निजी साइबर विशेषज्ञ के खिलाफ आरोप जारी रहे।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- सरकार ने पुलिस अधिकारियों पर मुकदमा चलाने की मंजूरी नहीं दी
- SIT ने चार पुलिस अधिकारियों के खिलाफ केस बंद कर दिया
- निजी साइबर विशेषज्ञ के खिलाफ अब भी आरोप जारी हैं
कर्नाटक में बिटकॉइन घोटाले की जांच को लेकर राजनीतिक‑कानूनी संघर्ष फिर से हवा में है। राज्य के कांग्रेस‑समर्थित सरकार ने पुलिस अधिकारियों को भ्रष्टाचार के आरोपों में मुकदमा चलाने की स्वीकृति (PSO) को नकार दिया, जिससे विशेष जांच टीम (SIT) ने चार पुलिस अधिकारियों के खिलाफ मामलों को बंद कर दिया। यह कदम, जो जुलाई 2026 में दर्ज किया गया, इस बात को उजागर करता है कि कैसे उच्च‑स्तरीय राजनीतिक हस्तक्षेप जांच प्रक्रिया को दिशा दे रहा है।
पृष्ठभूमि और SIT की स्थापना
जून 2023 में कांग्रेस सरकार के सत्ता में आने के बाद, बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच कर्नाटक CID ने बिटकॉइन घोटाले के लिए विशेष जांच टीम (SIT) गठित की। यह टीम 2020‑21 में बंगालुरु के सेंट्रल क्राइम ब्रांच (CCB) द्वारा किए गये कई डिजिटल फॉरेंसिक कार्यों की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिये बनाई गई थी।
पुलिस अधिकारियों के खिलाफ आरोप और बंदीकरण
जनवरी 2024 में दर्ज प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) में चार पुलिस अधिकारियों – डिप्टी सुपरिंटेंडेंट ऑफ़ पुलिस स्रीधर पुजार, इंस्पेक्टर प्रशांत बाबू, एस आर चंद्रधर और लक्ष्मीकांतैया – को किकबैक और दस्तावेज़ नष्ट करने के आरोपों में शामिल किया गया था। सरकार ने इन पर मुकदमा चलाने की स्वीकृति नहीं दी, और SIT ने अगस्त 2023 में दर्ज दूसरे FIR को भी बंद कर दिया, जिसमें CCB के अनाम अधिकारियों पर लैपटॉप‑फ़ोन के छेड़छाड़ के आरोप लगे थे।
साइबर विशेषज्ञ के खिलाफ जारी आरोप
जबकि पुलिस अधिकारियों के केस बंद हो गए, निजी साइबर विशेषज्ञ के एस संथोष कुमार के खिलाफ अभी भी गंभीर आरोप लगे हुए हैं। 2020‑21 में CCB ने उनके सहयोग से हैकर श्रीकृष्ण रमेश (स्रिकि) के द्वारा चुराए गए बिटकॉइन को ट्रैक करने की कोशिश की थी, परन्तु बाद में पता चला कि उन्होंने हैकर के अकाउंटेंट रॉबिन खंडेलवाल के क्रिप्टो वॉलेट से 1.83 लाख रुपये मूल्य के बिटकॉइन को अपने वॉलेट में ट्रांसफर कर दिया था। यह तथ्य ED (एन्फोर्समेंट डिरेक्टरेट) के वित्तीय ऑडिट रिपोर्ट में उजागर हुआ, जिससे साइबर विशेषज्ञ के खिलाफ अब भी मुकदमा चल रहा है।
भविष्य की संभावनाएँ और आर्थिक प्रभाव
इस निर्णय के बाद, कर्नाटक में डिजिटल अपराधों की जांच में पुलिस की भरोसेमंदी और सरकारी स्वीकृति के बीच जटिल संबंध स्पष्ट हो रहा है। यदि सरकार भविष्य में ऐसे मामलों में स्वीकृति नहीं देती, तो जांच प्रक्रिया में देरी और न्यायिक बोझ बढ़ सकता है। साथ ही, बिटकॉइन जैसी डिजिटल संपत्तियों में धोखाधड़ी के बढ़ते मामलों के कारण, साइबर सुरक्षा और वित्तीय नियमन दोनों में कड़ी निगरानी की आवश्यकता स्पष्ट हो गई है।