नॉइडा पुलिस ने एक नकली कॉल‑सेंटर को बंद कर दिया, जिसने स्पाइसजेट के नाम पर हजारों रुपये लेकर कई लोगों को धोखा दिया। एक 40‑वर्षीय कानपुर निवासी ने पहली बार नौकरी मिलने की खुशी में 12,130 रुपए जमा कराए, पर एयरपोर्ट पर ही सच्चाई का सामना किया।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • नॉइडा में फर्जी कॉल सेंटर का पर्दाफाश
  • कानपुर के कई लोगों को नौकरी के झूठे वादे से धोखा
  • पुलिस ने ऑपरेशन साइबर वज्र के तहत चार आरोपियों को गिरफ्तार किया

दस दिन पहले, 40‑वर्षीय कानपुर के निवासी ने अपने शहर के घरेलू हवाई अड्डे पर कदम रखा, यह मानते हुए कि वह नई नौकरी की पहली शिफ्ट शुरू करने वाला है। कई सालों से बेरोजगार रहने और अपने बेटे की नौकरी खोज में कठिनाइयों को देख कर, उसने ऑनलाइन जॉब पोर्टल पर निरंतर आवेदन किया। तभी एक अजनबी ने फोन करके बताया – “क्या आप अभी भी नौकरी की तलाश में हैं? हमें आपके नज़दीकी हवाईअड्डे पर खाली पद मिल रहे हैं।” यह व्यक्ति खुद को स्पाइसजेट के रिक्रूटमेंट एजेंट बताता है।

धोखे की प्रक्रिया

पीड़ित ने तुरंत “जवाब” दिया और एजेंट को 1,150 रुपये पंजीकरण शुल्क और 5,480 रुपये प्रशिक्षण शुल्क के रूप में भुगतान किया। बाद में एजेंट ने अतिरिक्त 6,000 रुपये यूनिफॉर्म के लिए मांगे, पर पीड़ित ने पहले काम पर रिपोर्ट करने की आशा में इसे टाल दिया। जब वह एयरपोर्ट पहुँचा, तो सुरक्षा कर्मियों ने उसे प्रवेश नहीं दिया। वह फिर से एजेंट को कॉल करने लगा, पर वह नंबर पहले ही बंद कर दिया गया था।

पुलिस की कार्रवाई

नॉइडा पुलिस ने इस झांसे को “ऑपरेशन साइबर वज्र” के अंतर्गत उजागर किया। विस्तृत मोबाइल फ़ोन और व्हाट्सएप चैट की जांच के बाद, investigators ने पता लगाया कि आरोपी ने ऑनलाइन जॉब पोर्टल से व्यक्तिगत डेटा लेकर नकली नियुक्ति पत्र तैयार किया और निधि को “म्यूल” बैंक खातों में जमा करवाया। नॉइडा सेक्टर‑2 में स्थित फर्जी कॉल सेंटर को रविवार को ध्वस्त कर दिया गया और सुदेश सिंह (36), ब्रजेश भधोरिया (38), अर्जुन (23) और संदीप कुमार (32)** को गिरफ्तार किया गया।

देशव्यापी परिप्रेक्ष्य

पुलिस के आंकड़ों के अनुसार, इस स्कैम से जुड़े लगभग 20 शिकायतें विभिन्न राज्यों से दर्ज हैं, जबकि वास्तविक पीड़ितों की संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है। नौकरी की तलाश में निराश लोग अक्सर ऐसे “जॉब ऑफ़र” पर भरोसा कर लेते हैं, खासकर जब बड़े एयरलाइन नामों का उल्लेख किया जाता है। यह मामला न केवल आर्थिक नुकसान का कारण बनता है, बल्कि व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा के प्रश्न को भी उजागर करता है।

आगे का मार्गदर्शन

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि कोई भी भर्ती एजेंट से जुड़ने से पहले उसकी वैधता की जाँच करें, आधिकारिक कंपनी वेबसाइट पर संपर्क स्थापित करें और कभी भी अग्रिम शुल्क न दें। साथ ही, डिजिटल सुरक्षा के लिए फ़ोन नंबर, IMEI और बैंक ट्रांसफ़र की जाँच अनिवार्य है। इस तरह की धोखाधड़ी को रोकने के लिए सार्वजनिक जागरूकता और सख़्त साइबर‑कानून आवश्यक हैं।