चेन्नई के JBAS कॉलेज फॉर वीमेन में आयोजित एक महत्वपूर्ण सेमिनार में शिक्षा और स्वास्थ्य देखभाल में मानसिक स्वास्थ्य के बदलते स्वरूपों पर चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने एआई के प्रभाव और संकट के समय लचीलापन (resilience) बनाने पर जोर दिया।

मुख्य बातें

  • शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा में मानसिक स्वास्थ्य अब एक केंद्रीय विषय बन गया है।
  • संकट के दौरान लचीलापन (Resilience) विकसित करना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए आवश्यक है।
  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग मानव बुद्धि के मार्गदर्शन में होना चाहिए।
  • तमिलनाडु में मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अब सामुदायिक पुनर्प्राप्ति (Community-centered recovery) की ओर बढ़ रही है।

चेन्नई स्थित जस्टिस बशीर अहमद सईद (JBAS) कॉलेज फॉर वीमेन के एप्लाइड साइकोलॉजी और बिहेवियरल रिसर्च विभाग द्वारा 'नेविगेटिंग द फ्यूचर: इमर्जिंग साइकोलॉजिकल ट्रेंड्स इन एजुकेशन एंड हेल्थकेयर' विषय पर एक दो दिवसीय सेमिनार का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में देश-विदेश के प्रख्यात वक्ताओं ने मानसिक स्वास्थ्य के बदलते आयामों और समाधान-केंद्रित चिकित्सा (Solution-focused therapy) पर अपने विचार साझा किए।

संकट और मानसिक लचीलापन

अन्ना एडमिनिस्ट्रेटिव स्टाफ कॉलेज के निदेशक जे. राधाकृष्णन ने अपने संबोधन में कहा कि मानसिक स्वास्थ्य अब केवल एक गौण चिंता नहीं रह गया है, बल्कि यह सार्वजनिक स्वास्थ्य, सामाजिक विकास और राष्ट्रीय लचीलेपन का एक अभिन्न अंग बन चुका है। उन्होंने COVID-19 और सुनामी जैसी आपदाओं का उदाहरण देते हुए बताया कि लचीलापन संकट से पहले बनाया जाता है, संकट के दौरान परखा जाता है और संकट के बाद मजबूत किया जाता है।

तकनीक और मानवीय बुद्धि का संतुलन

सेमिनार के दौरान एआई (AI) के बढ़ते प्रभाव पर भी गहन चर्चा हुई। JBAS की प्रिंसिपल अमथुल अजीज ने एक महत्वपूर्ण चेतावनी देते हुए कहा कि तकनीक को मनुष्य पर हावी नहीं होना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि मानव बुद्धि को एआई का मार्गदर्शन करना चाहिए, न कि इसके विपरीत।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि जैसे-जैसे समाज डिजिटल युग में प्रवेश कर रहा है, मानसिक स्वास्थ्य और तकनीक के बीच का संतुलन भविष्य की सबसे बड़ी चुनौती होगी। शिक्षा और स्वास्थ्य देखभाल में मनोवैज्ञानिक रुझानों को समझना केवल शैक्षणिक आवश्यकता नहीं, बल्कि सामाजिक स्थिरता के लिए अनिवार्य है।

मानसिक स्वास्थ्य अब सार्वजनिक स्वास्थ्य और राष्ट्रीय उत्पादकता का आधार बन चुका है।

इस अवसर पर मैरीवुड यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर ब्रैडली ए. जेनी ने विभिन्न पीढ़ियों के बीच बदलते मनोवैज्ञानिक व्यवहारों पर मुख्य भाषण दिया। साथ ही, कॉलेज की पूर्व वरिष्ठ व्याख्याता स्वर्गीय सावित्री कृष्णन की स्मृति में 'डॉ. सावित्री कृष्णन एंडोमेंट लेक्चर' की भी शुरुआत की गई।

Frequently Asked Questions

1. JBAS सेमिनार का मुख्य विषय क्या था?
इसका मुख्य विषय शिक्षा और स्वास्थ्य देखभाल में उभरते मनोवैज्ञानिक रुझान और भविष्य की दिशाएं थीं।

2. तमिलनाडु में मानसिक स्वास्थ्य देखभाल कैसे बदल रही है?
तमिलनाडु अब संस्थागत देखभाल से हटकर सामुदायिक-केंद्रित पुनर्प्राप्ति (Community-centered recovery) मॉडल की ओर बढ़ रहा है।

Did You Know?: तमिलनाडु का ECRC मॉडल बेघर मानसिक रोगियों के पुनर्वास और सामाजिक एकीकरण में एक सफल उदाहरण है।