चेनई में सदी पुरानी संस्थान में मुख्यमंत्री विजय ने वार्ड, आईसीयू और नवजात शिशुओं की देखभाल की जाँच की। उन्होंने उपचार में माँओं की स्थिति, सुविधाओं की गुणवत्ता और भ्रष्टाचार के मामलों पर विस्तृत पूछताछ की।
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने बुधवार को एगमोर, चेन्नई में स्थित इन्स्टिट्यूट ऑफ़ ऑब्स्टेट्रिक्स एंड गाइनकोलॉजी (IOG) और सरकारी महिला एवं बाल अस्पताल का आश्चर्यजनक दौरा किया। यह अस्पताल 100 साल से अधिक पुराना है और राज्य के प्रमुख मातृ‑शिशु स्वास्थ्य केंद्रों में से एक माना जाता है।
निरीक्षण का दायरा और प्रमुख बिंदु
मुख्यमंत्री ने वार्ड, इंटेंसिव केयर यूनिट (ICU) और नवजात शिशु देखभाल इकाई का व्यक्तिगत निरीक्षण किया। उन्होंने इलाज में लगी माताओं की सेहत, डॉक्टर‑नर्सों के कार्य‑प्रणाली और अस्पताल की बुनियादी सुविधाओं की स्थिति के बारे में विस्तृत प्रश्न पूछे। इस दौरान उन्होंने कुछ नवजात शिशुओं को अपनी बाँहों में लेकर उनके स्वास्थ्य के बारे में डॉक्टरों से चर्चा की।
साथियों का सहयोग और प्रशासनिक कदम
मुख्यमंत्री के साथ स्वास्थ्य, मेडिकल एजुकेशन एवं फैमिली वेलफ़ेयर मंत्री के.जी. अरुणराज और स्वास्थ्य सचिव दरेज़ अहमद भी उपस्थित थे। दोनों ने मुख्यमंत्री को अस्पताल में चल रहे विभिन्न चिकित्सा कार्यक्रमों और स्टाफ की कार्यशैली के बारे में जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने तुरंत एक कार्य योजना तैयार करने का निर्देश दिया, जिससे अस्पताल को एकीकृत सुविधा में परिवर्तित किया जा सके, जिसमें आधुनिक उपकरण, साफ‑सुथरी बाथरूम, और माताओं के लिये निजी कक्ष शामिल हों।
भ्रष्टाचार पर कड़ी कार्रवाई
डॉ. अरुणराज ने बताया कि हाल ही में अस्पताल में कुछ कर्मचारियों द्वारा नवजात शिशुओं को परिवारों को दिखाने के लिए रिश्वत लेने की शिकायतें मिली थीं। मुख्यमंत्री ने इन आरोपों को गंभीरता से लेते हुए दोषी पाए जाने वाले कर्मचारियों को तुरंत बर्ख़ास्त करने और 104 हेल्पलाइन के माध्यम से शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया को सुदृढ़ करने का आदेश दिया। यह कदम सार्वजनिक विश्वास को पुनर्स्थापित करने के लिये महत्वपूर्ण माना गया।
भविष्य की दिशा और सामाजिक प्रभाव
इस प्रकार के आश्चर्यजनक निरीक्षण न केवल स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को सुधारते हैं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही को भी बढ़ाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस योजना को समय पर लागू किया गया, तो एगमोर का यह अस्पताल मातृ‑शिशु मृत्यु दर को घटाने में मॉडल बन सकता है और अन्य राज्य अस्पतालों के लिये भी प्रेरणा स्रोत बन सकता है।
आगे चलकर, मुख्यमंत्री ने कहा कि वे इस संस्थान के पुनरुद्धार को लगातार निगरानी में रखेंगे और जनता को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करने के लिये सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।