खाद्य नियामक FSSAI ने कई कंपनियों को भ्रामक लेबलिंग के लिये शो‑कॉज़ नोटिस जारी किया। कुबेरा फूड्स, फ़र्न्स एन पेटल्स और लोट्टे इंडिया के उत्पादों में ‘100 % Natural’, ‘Premium Chocolate’ और ‘100 % Vegetarian’ जैसे दावे असत्य पाए गए। यह कार्रवाई उपभोक्ताओं को सही सूचना प्रदान करने के उद्देश्य से की गई है।

नई दिल्ली – खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने हाल ही में तीन प्रमुख कंपनियों – लोट्टे इंडिया कॉरपोरेशन, फ़र्न्स एन पेटल्स और कुबेरा फूड्स – को उनके उत्पादों पर लगाए गए भ्रामक लेबलिंग के लिये औपचारिक शो‑कॉज़ नोटिस भेजे। इन नोटिसों में कंपनीयों को सात दिनों के भीतर स्पष्टीकरण देने का आदेश दिया गया है, ताकि खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम के तहत आगे की कार्रवाई तय की जा सके।

भ्रामक दावे और उनके प्रभाव

कुबेरा फूड्स के Soft and Fresh Cream Bun Pineapple पर ‘100 % Natural’ का टैग लगाया गया था, जबकि पैकेज पर ही प्रिज़रवेटिव्स, सिंथेटिक रंग और फ्लेवरिंग एजेंट का उल्लेख था। इसी प्रकार, फ़र्न्स एन पेटल्स के Roasted Almond Chocolate को ‘Premium Chocolate’ कहा गया, परन्तु वास्तविक सामग्री में कोको बटर की जगह हाइड्रोजेनेटेड वैजिटेबल फैट इस्तेमाल किया गया था, साथ ही बादाम की मात्रा का खुलासा नहीं किया गया।

लोट्टे इंडिया के कई उल्लंघन

लोट्टे इंडिया के पोर्टफोलियो में कई उत्पादों पर ‘100 % Vegetarian’ का दावा किया गया था, जबकि कुछ चको पाई वैरायटी में यह दावा सही नहीं था। फ्रूट‑फ़्लेवर्ड Fruitz Eclairs में फल का कोई प्रयोग नहीं था, और पेपेरो बिस्किट स्टिक पर पोषण संबंधी जानकारी गायब थी। इसके अलावा, पुराने प्री‑प्रिंटेड लेबल और कुछ लॉलीपॉप में विटामिन‑लेवल के उल्लंघन भी नोट किए गए।

उपभोक्ता जागरूकता और नियामक प्रतिक्रिया

AIIMS दिल्ली की डाइटिशियन मोनिता घेलोत ने कहा, “भोजन लेबल उपभोक्ता के लिए पहली सूचना स्रोत होते हैं। पैकेज के सामने वाला दावा बैक पर दी गई विस्तृत जानकारी से मेल खाना चाहिए। उपभोक्ता को सामग्री सूची, पोषण तथ्य, एलर्जेन डिक्लरेशन आदि पढ़ना अनिवार्य है।” इस संदर्भ में FSSAI की सख्त जांच का मकसद न केवल नियम उल्लंघन को रोकना, बल्कि बाजार में भरोसा भी बहाल करना है।

भविष्य की दिशा

भविष्य में नियामक निकायों से अपेक्षा है कि वे लेबलिंग मानकों को और कड़ाई से लागू करेंगे, साथ ही कंपनियों को स्वैच्छिक ऑडिट और प्रमाणन प्रक्रियाओं को अपनाने के लिये प्रोत्साहित करेंगे। यह कदम भारतीय उपभोक्ताओं को उच्च गुणवत्ता वाले खाद्य पदार्थ प्रदान करने की दिशा में एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।